रुक्मिणी-श्रीकृष्ण विवाह का मनोहारी प्रसंग सुन श्रद्धालु हुए भाव-विभोर,भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला मानव कल्याण और धर्म की स्थापना का संदेश,आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज
रुड़की।ज्योतिष गुरुकुलम नवग्रह पीठ,पुरानी तहसील रुड़की में पितृपक्ष के पावन अवसर पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिवस कथा व्यास एवं आध्यात्मिक गुरु रमेश सेमवाल जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के दिव्य विवाह का मनोहारी वर्णन किया।कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के रुक्मिणी हरण से लेकर उनके विवाह तक के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और भक्ति में झूमने लगे।रमेश सेमवाल जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला के पीछे मानव कल्याण का गहरा संदेश निहित है।भगवान का रुक्मिणी जी के साथ विवाह केवल एक वैवाहिक प्रसंग नहीं,बल्कि प्रेम,समर्पण,श्रद्धा,धर्म और सत्य की विजय का दिव्य संदेश है।रुक्मिणी जी भगवान श्रीकृष्ण को अपने आराध्य के रूप में स्वीकार करती हैं और पूर्ण श्रद्धा के साथ उन्हें पाने के लिए भगवान की शरण में जाती हैं।कथा व्यास ने बताया कि रुक्मिणी जी ने भगवान श्रीकृष्ण को अपना सर्वस्व मानकर उन्हें संदेश भेजा।उनकी अटूट भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण स्वयं रुक्मिणी जी को लेने पहुंचे,इसके पश्चात भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी जी का दिव्य विवाह संपन्न हुआ।उन्होंने कहा कि यह ब्रह्म विवाह प्रेम और आत्मिक मिलन का प्रतीक माना जाता है,जिसमें सांसारिक स्वार्थ से ऊपर उठकर धर्म और समर्पण की भावना प्रमुख होती है।उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में कितनी भी विपरीत परिस्थितियां क्यों न आएं,यदि उसका विश्वास भगवान के प्रति अटूट है तो भगवान उसका मार्ग अवश्य प्रशस्त करते हैं।रुक्मिणी जी की भक्ति हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा,विश्वास और समर्पण से जीवन में आध्यात्मिक शक्ति का संचार होता है।भागवत कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी जी के विवाह का दिव्य प्रसंग प्रस्तुत होते ही वातावरण भक्तिमय हो गया।कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की आरती कर विश्व कल्याण एवं सभी पितरों की शांति की प्रार्थना की।कथा में राधा भटनागर,चित्रा गोयल,सुलक्षणा सेमवाल,वंदना जायसवाल,रितु वर्मा,राखी,पूजा वर्मा,मीनाक्षी वर्मा,रेनू शर्मा आदि भक्तगण मौजूद रहे।




