गोवर्धन लीला ने दिया अहंकार,त्याग और प्रकृति संरक्षण का संदेश,आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज
रुड़की।ज्योतिष गुरुकुलम नवग्रह पीठ,पुरानी तहसील रुड़की में पितृपक्ष के पावन अवसर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस कथा व्यास एवं आध्यात्मिक गुरु आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं,गोवर्धन लीला तथा कलियुग में भगवान की भक्ति की महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन किया।कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में भाव-विभोर हो गए।आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतार केवल एक लीला नहीं,बल्कि धर्म की स्थापना,अधर्म के विनाश और मानव समाज को सत्य,प्रेम,करुणा एवं भक्ति का मार्ग दिखाने के लिए हुआ।भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं मानव जीवन को सहजता,प्रेम और आनंद का संदेश देती है।कथा व्यास ने गोवर्धन लीला का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब ब्रजवासी प्रतिवर्ष इंद्र देव की पूजा की तैयारी कर रहे थे,तब बाल श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि हमें अपने जीवन का पालन-पोषण करने वाली गोवर्धन पर्वत,गौ माता,वन एवं प्रकृति के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए,इसके बाद ब्रजवासियों ने गोवर्धन पूजा की।इंद्र देव को जब इसका पता चला तो उन्होंने क्रोधित होकर ब्रज में मूसलाधार वर्षा कर दी।ब्रजवासियों की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर लिया और समस्त ब्रजवासियों तथा गौवंश को उसके नीचे आश्रय दिया।कहा कि गोवर्धन लीला का संदेश है कि अहंकार चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो,भगवान के सामने उसका कोई अस्तित्व नहीं रहता।मनुष्य को शक्ति,पद,धन और प्रतिष्ठा मिलने पर अहंकार नहीं करना चाहिए।भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार का नाश कर यह संदेश दिया कि सच्ची भक्ति में विनम्रता आवश्यक है।कथा में नवनीत गर्ग,राधा भटनागर,चित्रा गोयल,पूजा वर्मा,सुलक्षणा सेमवाल,परीक्षा,रेनू शर्मा,रितु वर्मा,राखी वर्मा व मीनाक्षी आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।




