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गांधी-शास्त्री जयंती पर गूंजा ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश

गांधी-शास्त्री जयंती पर गूंजा ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जागरूकता रैली एवं विचार गोष्ठी का आयोजन
हरिद्वार, 2 अक्टूबर। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में माहपर्यंत संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत शुक्रवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती श्रद्धा, सम्मान एवं राष्ट्रसेवा की भावना के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में ‘वोकल फॉर लोकल जागरूकता रैली’ का आयोजन कर स्वदेशी, आत्मनिर्भरता तथा स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. रामाकांत पाण्डेय ने कहा कि महात्मा गांधी द्वारा प्रतिपादित स्वदेशी का सिद्धांत आज आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की आधारशिला बन चुका है। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों का सम्मान और उनका उपयोग केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का भी प्रतीक है। गांधीजी के विचार तथा लाल बहादुर शास्त्री का सादगी, श्रम और राष्ट्रनिष्ठा का जीवन-दर्शन आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।कुलसचिव श्री दिनेश राणा ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना देश की आर्थिक सुदृढ़ता, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों से ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को अपने व्यवहार में उतारने का आह्वान किया।सेवा संकल्प अभियान की नोडल अधिकारी प्रो. बिंदुमती द्विवेदी ने कहा कि सेवा, स्वच्छता, स्वावलंबन और सामाजिक सहभागिता गांधीजी के जीवन के मूल तत्व रहे हैं। विश्वविद्यालय द्वारा संचालित सेवा संकल्प अभियान इन्हीं मूल्यों को विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में विकसित करने का एक सार्थक प्रयास है।कार्यक्रम संयोजक डॉ. प्रकाश चन्द्र पंत ने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि स्थानीय प्रतिभा, कौशल और उद्यमिता को सम्मान दिलाने का जनआंदोलन है। उन्होंने युवाओं से स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देकर आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त बनाने का आह्वान किया। सह नोडल अधिकारी मीनाक्षी सिंह रावत ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रभक्ति का वास्तविक स्वरूप राष्ट्रहित के प्रत्येक कार्य में सहभागिता से प्रकट होता है। स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग तथा स्थानीय उत्पादकों के समर्थन से भी राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को गति मिलती है।इस अवसर पर छात्र-अध्यापक अनुज कुमार एवं जगदीश पांडे ने महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने युवाओं से दोनों महापुरुषों के आदर्शों को आत्मसात कर समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का आह्वान किया।
इसके उपरांत विश्वविद्यालय परिसर में ‘वोकल फॉर लोकल जागरूकता रैली’ निकाली गई। रैली में प्रतिभागियों ने ‘लोकल अपनाओ—देश बढ़ाओ’, ‘स्वदेशी वस्तु अपनाएँ—आत्मनिर्भर भारत बनाएँ’ तथा ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे प्रेरक नारों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों के उपयोग और प्रचार-प्रसार का संदेश दिया। रैली ने विश्वविद्यालय परिसर में स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के प्रति उत्साहपूर्ण वातावरण का निर्माण किया। कार्यक्रम में प्रो. मनोज किशोर पन्त, प्रो. दामोदर प्रजापति, डॉ. चंद्रशेखर शर्मा, डॉ. उमेश कुमार शुक्ल, श्री मनोज गहतोड़ी (निजी सचिव), डॉ. श्वेता अवस्थी,डॉ राजेश सती, डॉ अनूप बहुखंडी, डॉ प्रिया शर्मा सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, कर्मचारीगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

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