निठारी कांड से जुड़े पूर्व आरोपी सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में संदिग्ध मौत, चाय की दुकान में मिला शव

हरिद्वार। निठारी कांड से जुड़े मामलों में पूर्व आरोपी रहे और बाद में अदालतों से बरी हुए सुरेंद्र कोली की शुक्रवार को हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। सप्त सरोवर रोड स्थित लाल माता मंदिर के सामने एक चाय की दुकान/खोखे में उसका शव फंदे पर लटका मिला। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटनास्थल से फिलहाल किसी सुसाइड नोट के मिलने की जानकारी नहीं है। पुलिस विभिन्न पहलुओं से मामले की जांच कर रही है।
निठारी मामले में हो चुका था बरी
सुरेंद्र कोली का नाम वर्ष 2006 में सामने आए नोएडा के चर्चित निठारी कांड के बाद देशभर में सुर्खियों में आया था। हालांकि उसकी वर्तमान कानूनी स्थिति को लेकर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि वह अब निठारी मामलों में दोषी नहीं था। अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी से जुड़े 12 मामलों में उसे बरी किया था। जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों में बरी किए जाने के खिलाफ अपीलें खारिज कर दीं। नवंबर 2025 में शीर्ष अदालत ने उसके अंतिम लंबित मामले में भी दोषसिद्धि रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया था।
करीब दो दशक की कानूनी प्रक्रिया के बाद रिहा हुआ कोली इसके बाद सामान्य जिंदगी जी रहा था। स्थानीय जानकारी के अनुसार वह कुछ समय से हरिद्वार में रह रहा था। बताया जा रहा है कि उसने पहले रोशनाबाद/सिडकुल क्षेत्र में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम किया और बाद में भूपतवाला क्षेत्र में चाय की दुकान पर काम करने लगा। हालांकि उसके हरिद्वार आने और अलग-अलग स्थानों पर काम करने की अवधि की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
परिवार से कथित बातचीत के बाद बढ़ा सवाल
स्थानीय निवासी धर्मेंद्र कौशिक के अनुसार, कोली ने काम दिलाने में मदद मांगी थी। उनकी मदद से उसे लाल माता मंदिर के सामने स्थित आंचल दुग्ध की दुकान पर चाय का काम मिला। धर्मेंद्र का कहना है कि उन्हें उस समय उसके अतीत की जानकारी नहीं थी और वह सामान्य व्यक्ति की तरह व्यवहार करता था।
धर्मेंद्र के मुताबिक घटना से पहले कोली के पास परिवार के किसी सदस्य का फोन आया था। कथित तौर पर बातचीत के दौरान वह परेशान दिखाई दिया और उसने परेशान किए जाने पर आत्महत्या करने की बात कही। हालांकि यह जानकारी फिलहाल स्थानीय व्यक्ति के बयान पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच से होना बाकी है। इसलिए इसे मौत का अंतिम कारण मानना जल्दबाजी होगी।
पुलिस सत्यापन पर भी उठे सवाल
कोली की मौत के बाद हरिद्वार में बाहरी लोगों और कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। यदि उसने सिडकुल क्षेत्र में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम किया था, तो यह जांच का विषय है कि नियुक्ति के समय उसका पुलिस सत्यापन कराया गया था या नहीं। यदि सत्यापन हुआ था तो उसका रिकॉर्ड क्या है और यदि नहीं हुआ तो इसके पीछे कारण क्या था।
घटनास्थल से आधार कार्ड मिलने की बात भी सामने आई है। हालांकि किसी व्यक्ति के निजी दस्तावेज या पहचान संबंधी विवरण सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा। जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि कोली हरिद्वार में कब आया, कहां रहा, किन स्थानों पर काम किया और किन दस्तावेजों के आधार पर उसे रोजगार मिला।
भूपतवाला जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सत्यापन व्यवस्था की समीक्षा जरूरी
भूपतवाला और सप्त सरोवर क्षेत्र धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत और पर्यटक आते हैं। ऐसे में बाहरी कर्मचारियों, किरायेदारों, सुरक्षा गार्डों और दुकानों पर काम करने वाले लोगों के सत्यापन की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है। घटना के बाद यह भी जांच का विषय है कि संबंधित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों का रिकॉर्ड स्थानीय स्तर पर रखा जा रहा था या नहीं।
पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि कोली हरिद्वार कब आया, कहां-कहां रहा, उसने किन संस्थानों में काम किया, उसका सत्यापन हुआ या नहीं और घटना से पहले उसके साथ क्या परिस्थितियां बनीं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच से खुलेगा मौत का राज
फिलहाल पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मौत आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई अन्य परिस्थिति थी, इसका निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगा। परिवार से हुई कथित फोन बातचीत, घटनास्थल की परिस्थितियों और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा सकती है।
निठारी कांड से जुड़े मामलों में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बरी हुए सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में हुई मौत ने एक बार फिर उसके पुराने अतीत को चर्चा में ला दिया है। लेकिन इस बार सबसे अहम सवाल निठारी कांड से ज्यादा उसकी हरिद्वार की जिंदगी और मौत की परिस्थितियों से जुड़े हैं—वह यहां कैसे पहुंचा, उसका सत्यापन हुआ या नहीं और आखिर उसकी मौत की असली वजह क्या थी? इन सवालों के जवाब पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होंगे।




