lपर्यावरण का संरक्षण भारतीय संस्कृति का मूल भाव : कुलपति उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार के पर्यावरणीय जागरूकता एवं मूल्य चेतना प्रकोष्ठ द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रमाकांत पांडेय ने कहा कि पर्यावरणीय संरक्षण का भाव भारतीय संस्कृति का मूलभूत हिस्सा रहा है। भारतीय जीवन शैली हमेशा पर्यावरणीय संरक्षण की पक्षधर रही है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे हम अपनी संस्कृति एवं सभ्यता से दूर होते गए वैसे-वैसे हमारे देश में पर्यावरणीय संकट की समस्या गंभीर होती चली गई,पर्यावरणीय जागरूकता के साथ हम अपनी संस्कृति और उसकी शिक्षाओं से जुड़े रहेंगे तो पर्यावरणीय समस्याएं स्वत: समाप्त हो जाएंगी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर परिसर के एमेरिटस प्रोफेसर राम कुमार शर्मा ने भारतीय संस्कृति में निहित पर्यावरणीय मूल्यों पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने महाकवि कालिदास के ग्रंथों में वर्णित पर्यावरणीय चेतना का उल्लेख करते हुए कहा कि शकुंतला अपने बालों में पुष्प लगाने की इच्छा तो रखती थी परंतु उन्होंने कभी उन फूलों को तोड़ने का प्रयत्न नहीं किया, आज हमें भी पर्यावरण के प्रति ऐसे ही सम्मान की भावना को विकसित करने की आवश्यकता है। पर्यावरण जागरूकता एवं मूल्य चेतना प्रकोष्ठ के नोडल अधिकारी डॉ विनय सेठी ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा एवं संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं है,आज देश के प्रत्येक नागरिक को इस दिशा में अपना योगदान देना चाहिए। उन्होंने दैनिक जीवन में पर्यावरण संरक्षण के लिए किये जाने वाले महत्वपूर्ण कार्यों की ओर सभी प्रतिभागियों का ध्यान खींचा। विद्यार्थी अमन कुमार दुबे ने ओजोन परत की चिंतनीय स्थिति पर अपने विचार साझा किए, छात्र दुबे ने सभी से पर्यावरण संरक्षण के लिए अपना योगदान देने का आह्वान किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय में कुलपति व अन्य अतिथियों द्वारा पौंधारोपण किया गया, धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर विंदुमती द्विवेदी ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव दिनेश कुमार राणा, वित्त नियंत्रक लखेंद्र गौथियाल, उपकुलसचिव संदीप प्रसाद भट्ट, सहायक कुलसचिव सुनील कुमार, निजी सचिव मनोज गहतोड़ी, प्रोफेसर अरविंद नारायण , डॉ मीनाक्षी सिंह रावत, सूरज डोभाल,सुधीर पालीवाल, अनीता कुकरेती , त्रिभुवन सिंह,धर्मेंद्र सिंह, चंद्रकला उप्रेती, जय कुमार उपस्थित रहे। संचालन भाषा एवं आधुनिक ज्ञान विज्ञान विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ अजय परमार ने किया।




