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काठा पीर मेले में अव्यवस्थाओं का अंबार, श्रद्धालु और दुकानदार परेशान

काठा पीर मेले में अव्यवस्थाओं का अंबार, श्रद्धालु और दुकानदार परेशान

लक्सर। प्रसिद्ध शाह मोहम्मद शाह काठा पीर मेले में इस बार व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं और दुकानदारों ने पेयजल, स्वच्छता, बिजली एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताई है। मेले में अव्यवस्थाओं का आलम ऐसा है कि पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, वहीं शौचालयों में भी पानी की भारी कमी बनी हुई है, जिससे श्रद्धालुओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।मेले परिसर और आसपास के क्षेत्रों में गंदगी के ढेर लगे होने से स्वच्छता व्यवस्था की पोल खुलती नजर आ रही है। श्रद्धालुओं का कहना है कि प्रशासन और मेला प्रबंधन की ओर से साफ-सफाई पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।दूसरी ओर मेले में लगी दुकानों से अवैध रूप से वसूली किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। कई दुकानदारों ने शिकायत करते हुए बताया कि ठेकेदार द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक रकम वसूली जा रही है। दुकानदारों का आरोप है कि मनमाने तरीके से धन उगाही कर उन्हें आर्थिक रूप से परेशान किया जा रहा है।बिजली व्यवस्था को लेकर भी गंभीर अनियमितताओं की चर्चा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मेले की दुकानों को विद्युत आपूर्ति दरगाह परिसर के मीटर एवं ट्रांसफार्मर से संचालित की जा रही है, जिसकी निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।इस बीच मेला प्रबंधन से संबंधित कार्यालय पर ताला लटका मिला, जिससे शिकायतों के समाधान को लेकर लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। श्रद्धालुओं और दुकानदारों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण समस्याओं का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।उधर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए एसपी देहात और लक्सर पुलिस क्षेत्राधिकारी ने मेला क्षेत्र का भ्रमण किया। अधिकारियों ने पुलिस बल को सतर्क रहने तथा मेले में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। पुलिस अधिकारियों ने दुकानदारों और आम लोगों से भी बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली।स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने प्रशासन से मेले की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार, पेयजल एवं स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराने, अवैध वसूली पर रोक लगाने तथा बिजली व्यवस्था की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो श्रद्धालुओं और व्यापारियों का आक्रोश बढ़ सकता है।

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