रिपोर्ट सलीम फारूकी
लाख वो मशके सितम जौरों जफा करते रहे
हम तो हक अपनी मोहब्बत का अदा करते रहे
अल्लामा शमीम कुरेशी हुए दारे फानी से रुखसत
मगलोर के आलमी शोहरत याफता शायर अल्लामा शमीम कुरैशी ने सुबह 4:00 बजे दुनिया को किया अलविदा
आपको बता दें मगलोर के यह वह शेयर थे जिन्होंने अपने जमाने में मुशायरों को अपने नाम किया
अल्लामा शमीम कुरैशी का जन्म 1 1 1933 में मोहल्ला किले में हुआ मंगलौर के आसपास क्षेत्र में सेंकड़ों शागिर्द भी मौजूद हैं जो शायरी में आपसे इसलाह के तौर पर फायदा उठाते थे हिंदुस्तान के अलग-अलग शहरों में अल्लामा शामीम कुरैशी की शायरी व आवाज के जादू को कयामत तक याद किया जाता रहेगा आपकी शायरी के साथ-साथ आपका अखलाक भी बहुत वसी था
अल्लामा शमीम मंगलौरी अबर अहसनी के शागिर्द बताए जा रहे हैं
इनके इंतकाल से पूरे मंगलौर व क्षेत्र में शोक की लहर छाई हुई है
मगलोर व मंगलौर के आसपास क्षेत्रों में यह अपना एक मुकाम रखते थे इनकी शायरी से सभी मंत्र मुग्ध होते थे अल्लामा की शायरी हिंदू मुस्लिम को एक जुट करने वाली शायरी थी शमीम कुरैशी ने अपने जीवन काल में बहुत से अवार्ड भी जीते अल्लामा शमीम कुरैशी का जीवन मिर्ज़ा ग़ालिब की तरह व्यतीत हुआ ऐसा बताते हैं
अल्लामा शमीम कुरैशी के शेर हैं
क़फ़स में रहते रहते एक जमाना हो गया हमको
नहीं मालूम गुलशन में हमारा आशियां कब था




