US ट्रेड डील के विरोध में 112 किसान संगठनों ने बनाया “देश बचाओ मोर्चा”, 21 जुलाई को दिल्ली में महापंचायतचंडीगढ़अमेरिका-भारत (US-India) ट्रेड डील के विरोध में देशभर के 112 से अधिक किसान संगठनों ने एकजुट होकर “देश बचाओ मोर्चा” का गठन किया है। चंडीगढ़ स्थित किसान भवन में आयोजित किसान पंचायत में इस मोर्चे की घोषणा की गई। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित ट्रेड डील किसानों, कृषि, पशुपालन और देश की खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकती है। बैठक में निर्णय लिया गया कि 21 जुलाई को दिल्ली स्थित किसान घाट पर देश बचाओ मोर्चा के बैनर तले विशाल किसान महापंचायत आयोजित की जाएगी। इस दौरान महात्मा गांधी की समाधि पर पहुंचकर केंद्र सरकार को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की जाएगी। साथ ही देशभर के जिलों से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर ट्रेड डील को तत्काल रद्द करने की मांग की जाएगी। आंदोलन के संचालन के लिए 6 सदस्यीय संचालन समिति का गठन किया गया है। इस समिति में किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी, सरदार वी.एम. सिंह, सरवन सिंह पंढेर, प्रकाश पोहरे सहित अन्य वरिष्ठ किसान नेताओं को शामिल किया गया है। समिति देशभर में आंदोलन की रणनीति तैयार करेगी और विरोध कार्यक्रमों का नेतृत्व करेगी। बैठक को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि यदि सरकार किसानों और मजदूरों की चिंताओं की अनदेखी करते हुए ट्रेड डील को आगे बढ़ाती है तो देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। उनका कहना था कि कृषि और किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। बैठक में भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन, किसान मजदूर मोर्चा (KMM), राष्ट्रीय किसान महासंघ, किसान महापंचायत, आजाद किसान मोर्चा, एसकेएम (गैर-राजनीतिक), ऑल इंडिया एमएसपी मोर्चा सहित 112 से अधिक किसान, मजदूर एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर सरदार वी.एम. सिंह, डॉ. बलबीर सिंह राजेवाल, गुरनाम सिंह चढूनी, सरवन सिंह पंढेर, चौधरी शाह आलम बिजू, अनिल तालियान, प्रकाश पोहरे, सुखविंदर सिंह खोसा, सुरजीत सिंह फूल, राजेश धाकड़, स्वामी हर्षानंद जी योगाचार्य, संत गोपालदास, एडवोकेट बलराज मलिक, रमिंदर सिंह (पटियाला), मनोज त्यागी सहित अनेक किसान एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, ओडिशा सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए किसान प्रतिनिधियों ने भी भाग लेकर आंदोलन को समर्थन देने का संकल्प लिया।




