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फूलों वाले ताजिया के इमामबाड़े पर हुई मोहर्रम अल हरम की पहली फातिहा

आगरा पाया चौकी स्थित फूलों वाले ताजिए के इमाम बड़े पर मोहर्रम का चांद देखने के साथ ही पहले फातिहा का आयोजन बड़ी ही अकीदत के साथ किया गया फूलों वाले ताजिए के चौधरी हाजी सरफराज खान ने बताया कि हर साल मोहर्रम का चांद देखने के साथ ही फूलों वाले ताजिए के इमामबाड़े मोहर्रम के महीने की पहली फातिहा की जाती है आज मोहर्रम का चांद दिखाने के साथ ही 17 जून 2026 दिन बुधवार को मोहर्रम की पहली तारीख मनाई जाएगी इस साल मोहर्रम की पहली तारीख से अब 1448 हिजरी लग गई है फातिहा में बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की फातिहा मौलाना इमामुद्दीन द्वारा पढ़ी गई उपस्थित लोगों ने मौला इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के सदके में अल्लाह तबारक ताला से देश के लिए अमन चैन खुशहाली की दुआ की फातिहा के बाद लंगर भी तक्सीम किया गया वही आस्ताना ए मैकश खानकाह कादरिया चिश्तिया नियाज़िया मेवा कटरा के जानशीन सैयद फैज अली शाह कादरी चिश्ती नियाजी ने कहा कि मौला इमाम हुसैन का महीना मुहर्रम उल हराम का चांद देखने के साथ ही इस्लामिक साल शुरू हो गया है जो कि आज से 1448 हिजरी रहेगा मौला इमाम हुसैन में कर्बला में अपनी एल्बम पूरे खानदान शहादत देकर इस्लाम को बचाया है आज हम तक जो इस्लाम पहुंचा है वह इमाम हुसैन की देन है पूरी दुनिया में इमाम हुसैन ने इस्लाम का परचम लहराया हम सभी को हक पर चलने का रास्ता मौला इमाम हुसैन में दिखाए मौला इमाम हुसैन ने सजदे में कर दे दिया लेकिन गलत के आगे मौला इमाम हुसैन ना झुके हम सभी को मौला इमाम हुसैन के बताए रास्ते पर चलना चाहिए क्योंकि मौला इमाम हुसैन का रास्ता ही हमको मौला इमाम हुसैन के नाना जान एवं अल्लाह के महबूब मोहम्मद साहब तक पहुंचना है मौला इमाम हुसैन से मोहब्बत करना हम सभी हुसैन के मानने वालों पर फर्ज है अगर मौला इमाम हुसैन कर्बला में सजदे में रहकर अपनी शहादत ना देते तो आज हम तक दीन ए इस्लाम की रोशनी नहीं आती फातिहा में मुख्य रूप से सोहेल खान ज़ुएब खान मुख्तार खान रोहल खान हरिश खान हाजी कासिम अली साबरी हाशिम साबरी हनीफ खान आदि लोग उपस्थित रहे

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