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भारतीय संस्कृति और सभ्यता में संस्कारों का विशेष महत्व,श्रीमद् भागवत कथा धर्म,अर्थ,काम,मोक्ष करती है प्रदान,आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज

रुड़की।ज्योतिष गुरुकुलम में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा धर्म,अर्थ,काम,मोक्ष प्रदान करती है।भारतीय संस्कृति और सभ्यता में संस्कारों का विशेष महत्व है।अपने जीवन में संस्कारों पर चलना चाहिए।उन्होंने विशेष कर युवा शक्ति का आह्वान किया कि वे भारतीय संस्कृति और सभ्यता पर चलकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें।उन्होंने कहा कि भारत ऋषि-मुनियों का देश है।आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने कहा कि भारत भूमि पर साक्षात परमात्मा का अवतार हुआ।श्रीराम के रूप में भगवान श्रीकृष्ण का अवतार हुआ।उन्होंने अधर्म का विनाश कर धर्म की स्थापना की।युवा शक्ति को भगवान श्रीराम से प्रेरणा लेनी चाहिए।भगवान श्रीराम ने पिता की आज्ञा मानकर चौदह वर्षों का वनवास स्वीकार किया और राक्षसों का संघार किया।भगवान श्रीकृष्ण ने गौ माता की सेवा की,इसलिए हमें श्रीराम और श्रीकृष्ण से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान करना चाहिए।उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म के पांच प्राण हैं।गो,गंगा,गीता,गायत्री और गोपाल।ये पांच प्राण हिंदू धर्म के सर्वश्रेष्ठ प्रतीक हैं,इनकी रक्षा करना प्रत्येक हिंदू युवा का कर्तव्य है।हम अगर अपने परंपरा पर चलेंगे तभी राष्ट्र का निर्माण होगा और ऋषि परंपरा की रक्षा होगी।भारत भूमि श्रीराम,ज्ञान और भक्ति की भूमि है।इस भूमि पर गौ माता की रक्षा महत्वपूर्ण है।गंगा रक्षा महत्वपूर्ण है और भगवान श्रीकृष्ण द्वारा जो ज्ञान हमें गीता के रूप में दिया गया है,उस पर चलकर ही हमारा जीवन सुख,शांति और समृद्धिमान बन सकता है।युवा शक्ति राष्ट्र शक्ति है युवा शक्ति को प्राचीन परंपरा को आगे बढ़कर अपने जीवन को सत्य की ओर ले जाना है।कथा में राधा भटनागर,चित्रा गोयल,सुलक्षणा सेमवाल,पूजा वर्मा,रितु वर्मा,रेनू शर्मा,अदिति सेमवाल आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

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