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ज्ञान विज्ञान की अमूल्य निधि है संस्कृत: त्रिवेंद्र सिंह रावतउत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के 21वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने संस्कृत भाषा के महत्व पर जोर दिया।

lज्ञान विज्ञान की अमूल्य निधि है संस्कृत: त्रिवेंद्र सिंह रावतउत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के 21वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने संस्कृत भाषा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल परंपराओं और धार्मिक अनुष्ठानों की भाषा नहीं, बल्कि ज्ञान-विज्ञान की अमूल्य निधि है। उन्होंने कहा कि संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए इसे रोजगार से जोड़ना आवश्यक है। जब तक भाषा आजीविका से नहीं जुड़ेगी, तब तक उसका व्यापक प्रसार संभव नहीं है। उन्होंने युवाओं से संस्कृत के अध्ययन और उसके आधुनिक उपयोगों पर ध्यान देने का आह्वान किया। सांसद ने उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया के कई विद्वान संस्कृत को आधुनिक तकनीक, खासकर क्वांटम कंप्यूटिंग के लिए उपयुक्त मानते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ाव ही किसी समाज और राष्ट्र को मजबूत बनाता है। समारोह में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने संस्कृत के संवर्धन को राज्य की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि देवभूमि की पहचान को मजबूत करने के लिए संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाना आवश्यक है। इस दिशा में सरकार द्वारा संस्कृत शिक्षा विभाग को अलग स्थापित करने और संस्कृत गांव विकसित करने जैसे प्रयास पूर्व में किए गए हैं। उन्होंने हरिद्वार और ऋषिकेश को संस्कृत नगरी के रूप में विकसित करने की योजना पर जोर देते हुए कहा कि ई-रिक्शा चालकों, होटल कर्मियों और अन्य सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों को संस्कृत के सामान्य शब्दों का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि पर्यटकों का स्वागत इस भाषा में हो सके। कौशिक ने चारधाम सहित प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी इस पहल को लागू करने की बात कही, साथ ही विश्वविद्यालयों से स्थापना दिवस को व्यापक रूप से मनाने और अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विश्वविद्यालय को संसाधनों की कमी नहीं आने दी जाएगी। इस अवसर परविशिष्ट अतिथि रानीपुर विधायक आदेश चौहान ने अपने वक्तव्य में कहा कि विश्वविद्यालय की विकास यात्रा को उन्होंने बहुत नजदीक से देखा है, इस अवधि में विश्वविद्यालय ने अनेक उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रमाकांत पांडे ने संस्कृत के व्यापक प्रसार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस समारोह को अगले वर्ष से तीन दिन तक आयोजित कर इसे प्रदेशव्यापी स्वरूप दिया जाएगा। कुलपति ने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय और संस्कृत भारती के सहयोग से जून में 21 दिवसीय संभाषण शिविर आयोजित करने की योजना है। साथ ही जुलाई से योग, कर्मकांड और ‘श्रीमद्भागवत’ पर पीजी डिप्लोमा सहित कई नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जिन्हें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों में संचालित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि छात्राओं के लिए नया हॉस्टल शीघ्र तैयार हो रहा है। संस्कृत को जनसामान्य तक पहुंचाने के लिए जेलों और समाज के विभिन्न वर्गों में भी कार्यक्रम चलाने की योजना है।।विश्वविद्यालय के कुलसचिव दिनेश कुमार राणा ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ. कंचन तिवारी ने किया।। इस अवसर पर प्रो. आरएन यादव, प्रो. दिनेश चंद्र चमोला, प्रो. मोहन चंद्र बलोदी, , प्रो. लक्ष्मी नारायण जोशी, प्रो. बिंदुमती द्विवेदी, डॉ हरीश चंद्र तिवाड़ी, डॉ उमेश शुक्ल,डॉ. अजय परमार, डॉ. प्रकाश पंत, डॉ, श्वेता अवस्थी, मनोज गहतोड़ी, आदि मौजूद रहे।

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