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गरीबों का राशन बाजार में बिक रहा है! ट्रेडिंग कंपनी पर सरकारी गेहूं-चावल की कालाबाजारी का गंभीर आरोप

लक्ज़र क्षेत्र में स्थित ट्रेडिंग कंपनी पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के गरीबों के लिए आवंटित सस्ते गेहूं और चावल की कालाबाजारी का गंभीर आरोप लगा है। स्थानीय लोगों और कुछ राशन कार्डधारकों का कहना है कि कंपनी राशन कार्ड धारकों से सरकारी अनाज खरीद रही है और उसे खुले बाजार में ऊंची कीमतों पर बेच रही है।शिकायतकर्ताओं के अनुसार, ट्रेडिंग कंपनी ने लक्सर सुल्तानपुर रायसी खानपुर और आसपास के इलाकों से सरकारी कोटे का गेहूं मात्र 20 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा और उसे बाजार में 30 से 35 रुपये प्रति किलो तक बेच दिया। चावल की कालाबाजारी भी इसी तरह बड़े पैमाने पर की जा रही है। आरोप है कि कंपनी फर्जी दस्तावेजों के जरिए अनाज को अपने गोदामों में रखती है और फिर ट्रालियों से विभिन्न शहरों तथा मिलों को सप्लाई करती है। इस काम में कुछ राशन डीलरों और स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत होने का भी संदेह जताया जा रहा है।गरीब परिवारों पर पड़ा असरइस कालाबाजारी के कारण रायसी, सुल्तानपुर और आसपास के इलाकों में कार्ड धारकों से ट्रेडिंग कंपनी वाले सरकारी राशन बड़े पैमाने पर खरीद रहे है।स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि ट्रेडिंग कंपनी जैसे निजी व्यापारी सरकारी राशन को ब्लैक में बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं, जबकि असल में यह अनाज गरीबों और जरूरतमंदों के लिए होता है।जांच की मांगप्रभावित क्षेत्र के लोगों और सामाजिक संगठनों ने खाद्य एवं रसद विभाग तथा पुलिस से इस मामले की तुरंत जांच करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ट्रेडिंग कंपनी के गोदामों की जांच की जाए और यदि अवैध अनाज बरामद होता है तो कंपनी के मालिक व संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि ई-पॉस मशीनों की सख्त निगरानी बढ़ाई जाए, अनाज की डिजिटल ट्रैकिंग लागू की जाए और दोषियों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी सजा दी जाए, ताकि भविष्य में गरीबों का राशन बाजार में न बिक सके।जनता से अपीलअगर किसी को ट्रेडिंग कंपनी या किसी अन्य जगह पर सरकारी गेहूं-चावल की कालाबाजारी, फर्जी बिलिंग या अवैध खरीद-फरोख्त की कोई जानकारी हो तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाने, जिला खाद्य एवं रसद विभाग या टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1967 पर सूचना दें। आपकी एक सूचना कई गरीब परिवारों का हक बचाने में मदद कर सकती है।

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