व्हीलचेयर पर मैक्स हॉस्पिटल पहुंचे मुजफ्फरनगर के इमरान, स्पाइनल ट्यूमर की सर्जरी के बाद दोबारा चलने लगे
मुजफ्फरनगर
रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर के कारण पैरों में कमजोरी और चलने-फिरने में परेशानी से जूझ रहे मुजफ्फरनगर निवासी 40 वर्षीय इमरान ने सर्जरी के बाद दोबारा चलना शुरू कर दिया है। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा में न्यूरोसर्जरी एवं न्यूरो स्पाइन विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. दिनेश रत्तनानी के नेतृत्व में मरीज की जटिल स्पाइनल ट्यूमर सर्जरी की गई। मरीज करीब दो महीने बाद स्वतंत्र रूप से चलने में सक्षम हो गए। इमरान पिछले छह महीने से कमर के निचले हिस्से में दर्द और बाएं पैर तक फैलने वाली तकलीफ से परेशान थे। उनके बाएं पैर में कमजोरी बढ़ गई थी और घुटने के नीचे संवेदना भी कम हो गई थी। चलने के लिए उन्हें सहारे की जरूरत पड़ती थी। इससे पहले एक अन्य अस्पताल में उनकी सर्जरी की गई थी, लेकिन ट्यूमर पूरी तरह नहीं निकल सका और पैर की ताकत में भी अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसके बाद वह व्हीलचेयर पर मैक्स हॉस्पिटल, नोएडा पहुंचे। अस्पताल में जांच के दौरान रीढ़ की हड्डी के D12-L1 स्तर पर करीब 3×3 सेंटीमीटर आकार का इंट्राड्यूरल एक्स्ट्रामेडुलरी स्पाइनल ट्यूमर पाया गया। यह ट्यूमर ड्यूरा नामक सुरक्षात्मक झिल्ली के भीतर स्थित था और पैरों की गतिविधियों तथा संवेदना को नियंत्रित करने वाली नसों पर दबाव डाल रहा था। मरीज की स्थिति को देखते हुए सर्जरी का निर्णय लिया गया। डॉ. दिनेश रत्तनानी के नेतृत्व में D12-L1 स्तर पर लैमिनेक्टॉमी के माध्यम से ट्यूमर को लगभग पूरी तरह निकाल दिया गया। ऑपरेशन के दौरान न्यूरो नर्व मॉनिटरिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया, ताकि नसों की कार्यक्षमता पर नजर रखी जा सके। ड्यूरा की सुरक्षित क्लोजर प्रक्रिया के लिए ड्यूराजेन और टिसील ग्लू का भी उपयोग किया गया। डॉ. दिनेश रत्तनानी ने बताया कि रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर होने पर लगातार कमर दर्द, पैरों में कमजोरी, संवेदना में बदलाव और चलने में परेशानी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। यदि ट्यूमर नसों पर दबाव डाल रहा हो तो इन लक्षणों को सामान्य कमर दर्द समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से कमजोरी बढ़ने या चलने-फिरने में कठिनाई होने पर समय रहते विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है।




