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मानवीय संवेदना पर आधारित है भारतीय संस्कृति : प्रो. मूर्ति उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में “वर्तमान समय में भारत की सांस्कृतिक सुरक्षा” विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया।

मानवीय संवेदना पर आधारित है भारतीय संस्कृति : प्रो. मूर्ति उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में “वर्तमान समय में भारत की सांस्कृतिक सुरक्षा” विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय, मुख्य वक्ता प्रो. जी एस मूर्ति एवं प्रो. बलवीर तलवार ने संयुक्त रूप से किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर रमाकांत पांडे ने कहा कि भारतीय संस्कृति की प्राचीनता, उसकी विविधता और वर्तमान समय में उसके संरक्षण की आवश्यकता बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा वैश्वीकरण के इस दौर में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। मुख्य वक्ता प्रख्यात परमाणु वैज्ञानिक प्रोफेसर जी. एस. मूर्ति ने अपने व्याख्यान में भारत की सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति केवल परंपराओं का समूह नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है, जो मानवता, सहिष्णुता और आध्यात्मिकता पर आधारित है। उन्होंने वर्तमान समय में सांस्कृतिक चुनौतियों जैसे पाश्चात्य प्रभाव, तकनीकी बदलाव और सामाजिक परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए इनसे निपटने के उपाय भी सुझाए। भेल हरिद्वार के पूर्व कार्यपालक निदेशक प्रोफेसर बलबीर तलवार ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण संभव है। उन्होंने छात्रों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया। कार्यक्रम की संयोजिका प्रोफेसर बिंदुमती द्विवेदी ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों का स्वागत कर कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुमन प्रसाद भट्ट द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रोफेसर दिनेश चंद्र चमोला, प्रोफेसर अरविंद नारायण मिश्रा, प्रोफेसर लक्ष्मी नारायण जोशी, डॉ. उमेश शुक्ला, प्रोफेसर दामोदर परगांई, डॉ. अर्पिता जोशी, डॉ. अनूप बहुखंडी, डॉ. राजेश सती, मनोज गहतोड़ी,डॉ पवन, सहित शिक्षा शास्त्र विभाग एवं योग विभाग विभाग के छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

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