संस्कृत विश्व विद्यालय में गुरु नानक देव के प्रकाश पर्व पर ई संगोष्ठी का आयोजन किया गया
रिपोर्ट महिपाल शर्मा l
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में गुरुनानक देव जी महाराज के प्रकाश पर्व पर ई संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय ‘ श्री गुरुनानकदेव जी का जीवन दर्शन था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामेश्वरम गुरुकुल के संस्थापक डॉ स्वामी केशवानंद जी महाराज ने कहा कि गुरुनानकदेव जी ने महान गुरूपरम्परा का शुभारंभ किया था,समाज में व्याप्त कुरीतियों पर कुठाराघात कर उन्होंने समाज में जन जागृति फैलाई,गुरुनानक देवजी ने समूची मानव सभ्यता को साझीवालता का संदेश दिया था।उन्होंने कहा कि भारत की धरती में समय के साथ हर कालखंड में अनेक महापुरुष अवतरित हुए हैं, जिन्होंने समाज का जागरण किया है , गुरुनानकदेव जी भी उन महापुरुषों में से एक थे जिन्होंने अपना सारा जीवन सामाजिक बुराईयों एवं कुरीतियों को दूर करने में लगा दिया ,वह भारतीय गुरूपरम्परा के सिरमौर थे, हमें अपने जीवन में ऐसे सन्तों के उपदेशों को उतारने की आवश्यकता है। स्वामी डॉ केशवानंद ने गुरुओं के जीवन पर विश्वविद्यालयों में शोध करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो दिनेशचंद्र शास्त्री ने कहा कि सामाजिक सद्भाव के लिए नानकदेव जी की जीवनी हमें प्रेरित करती है। समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने के लिए उन्होंने ऐतिहासिक कार्य किया,अपने उपदेशों से समाज को जागरूक किया। गुरुनानक देव जी महाराज के जीवन से जुड़े हुए प्रसंगों को प्रोफेसर दिनेशचंद्र शास्त्री ने साझा किया।कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि राष्ट्र की सेवा के लिए धरती पर समय समय पर समाज सुधारक के रूप में गुरुओं ने मार्गदर्शक की भूमिका निभाई है।
कार्यक्रम के संयोजक सहायक आचार्य डॉ लक्ष्मी नारायण जोशी ने संचालन किया।इस अवसर पर सहायक आचार्य सुशील चमोली,डॉ अरुण मिश्र, मनोज गहतोड़ी सहित अनेक छात्र छात्राएं उपस्थित थे।




