उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार के शिक्षाशास्त्र विभाग में ‘विभाजन विभीषिका वार्षिक स्मृति दिवस’ के अवसर पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के विभाजन के दौरान उत्पन्न मानवीय पीड़ा, विस्थापन, संघर्ष एवं सामाजिक परिस्थितियों को स्मरण करते हुए विद्यार्थियों में राष्ट्रीय एकता, सद्भाव एवं सामाजिक समरसता की भावना को जागृत करना था।
कार्यक्रम में शिक्षाशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर प्रकाश चंद्र पंत, हिमालयीय आयुर्वेदिक कॉलेज, देहरादून के प्रोफेसर नवीन जसौला, प्रोफेसर अरविन्द नारायण मिश्र, सह संयोजक डॉ. सुमन प्रसाद भट्ट डॉ बिन्दुमती द्विवेदी, मीनाक्षी सिंह रावत डॉ राजेश सती सहित विश्वविद्यालय के अनेक छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
विभाजन विभीषिका विषय पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उसके दौरान लोगों द्वारा झेली गई पीड़ा एवं विस्थापन तथा उसके सामाजिक प्रभावों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों ने अपने वक्तव्यों के माध्यम से यह संदेश दिया कि इतिहास की त्रासद घटनाओं को स्मरण करने का उद्देश्य केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि वर्तमान एवं भावी पीढ़ी को राष्ट्रीय एकता, भाईचारे, सहिष्णुता और मानवता के प्रति जागरूक करना भी है।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का विभाजन इतिहास की एक अत्यंत पीड़ादायक घटना थी। इससे हमें यह सीख मिलती है कि सामाजिक सद्भाव, आपसी विश्वास और राष्ट्रीय एकता को सदैव मजबूत बनाए रखना आवश्यक है। विद्यार्थियों से आह्वान किया गया कि वे राष्ट्र की एकता एवं अखण्डता को बनाए रखने में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएँ।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। भाषण प्रतियोगिता ने छात्र-छात्राओं को अपने विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया तथा उन्हें भारतीय इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय के प्रति संवेदनशील बनाया।
अंत में विभाग की ओर से उपस्थित सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय एकता, अखण्डता एवं सामाजिक सद्भाव की भावना को सुदृढ़ करने के संकल्प के साथ हुआ।




