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कोर यूनिवर्सिटी में सनातन मंथन के संत सम्मेलन आयोजत

कोर यूनिवर्सिटी में सनातन मंथन के संत सम्मेलन आयोजत l- आज की युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति ओर संस्कारों से भटक गई : महामंडलेश्वर अनंतानंद महाराज कोर यूनिवर्सिटी में सनातन मंथन के संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के संतों, महामंडलेश्वरों ने अपने अपने शब्दों में संस्कार ओर आध्यात्मिक शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर महामंडलेश्वर अनंतानंद महाराज ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति ओर संस्कारों से भटक गई है, जिन बच्चों के ऊपर माता पिता का आशीर्वाद नहीं होता, वह जीवन में कभी तरक्की नहीं कर सकते, उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में जब बच्चे उठते है, तो सबसे पहले उन्हें मां-बाप को प्रणाम करना चाहिए और उनके पैर छूने से दीर्घायु मिलती है, जीवन में सफलता ओर बीमारियों से मुक्ति मिलती है। उन्होंने वेस्टर्न कल्चर को छोड़कर आयुर्वेद अपनाने की सलाह दी। महामंडलेश्वर डॉ. रमनपुरी ने जीवन में परंपराओं के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी सोशल मीडिया की रील स्क्रॉल करने में ज्यादा बिजी रहती है, जबकि उन्हें गीता ओर वेद जैसे धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन कर जीवन में आगे बढना चाहिए। महंत सरिता गिरी (प्रयागराज) ने कहा कि सनातन धर्म का पहला पाठ पढ़ाई होता है। पढ़ने से मनुष्य ज्ञान अर्जित कर आगे बढ़ता है। उन्होंने सरकारों से भी मांग की कि सभी स्कूल, कॉलेजों में सनातन पद्धति को बढ़ावा देते हुए सनातन परंपराओं को आगे बढ़ाने में दिलचस्पी दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य नहीं था, न ही सृष्टि थी, उस समय केवल एक शक्ति थी, जो संसार में आने के लिए तैयार थी, आज इसी शक्ति के सहारे स्त्री का सम्मान होता है। महामंडलेश्वर वैराग्यानंद महाराज (मध्य प्रदेश) ने कहा कि रील देखकर नहीं गीता पढ़कर ज्ञानी बना जा सकता है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन पर चर्चा की कहा कि जब विदेशी धरती पर स्वामी विवेकानंद ने अपना भाषण दिया तो वहां के लोग सनातन संस्कृति के कायल हो गए। महामंडलेश्वर आदि योगी महाराज ने कहा को जो लोग सनातन को पाखंड मानते है, वह स्वयं पाखंडी है। उन्होंने भगवान शिव के “त्रिशूल” की वैज्ञानिक परिभाषा से सभी को ओतप्रोत कर दिया। उन्होंने त्रिशूल के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सभी को अच्चंभित कर दिया। दर्शन भारती ने कहा कि आज देश की बेटी जिहाद के खतरे में है, हम6 सभी को इस जिहाद से डटकर मुकाबला करना है और जिहादी मानसिकता वाले लोगों को कड़ा संदेश देना है, ताकि जिहादी लोग हमारी बहन बेटियों से दूर रहे। उन्होंने युवाओं से मजबूत होने तथा नशाखोरी से बचने की अपील की। हमें पूवर्जों की विरासत को सुरक्षित रखना है। आज सनातन कुर्बानी मांग रहा है। चेतना ज्योति आश्रम से शुभम महंत ने छात्र छात्राओं को सनातन संस्कृति अपनाकर जीवन मूल्यों को समझने को आश्वयकता पर बल दिया। संत सम्मेलन को साध्वी निहारिका, महामंडलेश्वर रामानंद सरस्वती जी महाराज, मोहनानंद गिरी महाराजा, हरिचेतना नंद महाराज आदि संतो ने भी सनातन शिक्षा ओर संस्कृति व संस्कारों पर ओजस्वी विचारों से बच्चों की चेतना जागृत की ओर उनमें नई ऊर्जा का संचार किया। यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जेसी जैन, वाइस चेयरमैन श्रेयांश जैन ने सभी संतो को नमन करते हुए कार्यक्रम में पहुंचने पर उनका हृदय की गहराइयों से जोरदार स्वागत किया। सम्मेलन की अध्यक्षता निरंजन अखाड़े के महा सचिव महामंडलेश्वर रामरतन गिरी महाराज। तथा संचालन वेद वर्धन कवि ने किया । इस मौके पर महामंडलेश्वर स्वामी रामानुज सरस्वती महाराज, मोहनानंद गिरि महाराज, अनंता नंद पूरी, राम रतन गिरी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी वैदमूर्ति, महंत ऋषिश्रानंद स्वामी, डॉ. रमनपुरी महाराज, सरितानंद गिरी महाराज, स्वामी हरिचेतना नंद महाराज, चेयरमैन जेसी जैन, उपाध्यक्ष श्रेयांश जैन, निदेशक चारु जैन आदि मौजूद रहे।

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