संस्कृत विश्व विद्यालय में चल रहे साप्ताहिक आत्मरक्षा कार्यशाला का समापन उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के महिला प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित साप्ताहिक आत्मरक्षा कार्यशाला का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। 2 फरवरी से 6 फरवरी 2026 तक आयोजित इस कार्यशाला में छात्र-छात्राओं को आत्मरक्षा एवं शारीरिक प्रशिक्षण का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया।हरिद्वार के अनुभवी प्रशिक्षक करूणानिधि पाण्डेय के कुशल मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने आत्मरक्षा की विविध तकनीकों को सीखा। प्रशिक्षण के दौरान छात्र-छात्राओं में आत्मविश्वास, साहस, अनुशासन और सजगता का उल्लेखनीय विकास देखने को मिला। कार्यशाला ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।समापन समारोह में महिला प्रकोष्ठ की नोडल अधिकारी डॉ. श्वेता अवस्थी ने कार्यशाला की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मरक्षा का ज्ञान आज के समय में प्रत्येक विद्यार्थी के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों को सीखी गई तकनीकों को व्यवहार में अपनाने के लिए प्रेरित किया।इस अवसर पर क्रीड़ा अधिकारी चंद्रशेखर शर्मा ने प्रशिक्षक करूणानिधि पाण्डेय के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके अनुभव और दक्षता से प्रशिक्षण अत्यंत प्रभावी रहा। महिला प्रकोष्ठ की सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह रावत ने छात्र-छात्राओं को अनुशासन और निरंतर अभ्यास के महत्व से अवगत कराया।समापन अवसर पर कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। साथ ही, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले तीन विद्यार्थियों को मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मानित विद्यार्थियों ने अपनी सफलता का श्रेय प्रशिक्षक एवं आयोजकों को दिया।कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण से उनमें आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना विकसित हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया। समापन सत्र में प्रो अरविंद नारायण मिश्र, प्रो विंदुमती द्विवेदी, डॉ प्रकाश चंद्र पन्त,डॉ कंचन तिवारी, डॉ सुमन प्रसाद भट्ट,डॉ विनय सेठी, श्रीमती अनिता कुकरेती उपस्थित रहे।




