दो दिवसीय योग प्रशिक्षण कार्यशाला का उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार में सफल समापन l
बहादराबाद 26 सितम्बर ( महिपाल )
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार के सौजन्य से आयोजित दो दिवसीय योग प्रशिक्षण कार्यशाला का साज सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह कार्यशाला 25 सितम्बर को प्रारम्भ हो कर आज और 26 सितम्बर को विश्वविद्यालय परिसर में संपन्न हुई। कार्यशाला में प्रदेशभर से 116नवयुक्त योग प्रशिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल योगाभ्यास कराना था बल्कि योग से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी एवं सामाजिक दायित्वों से भी प्रतिभागियों को अवगत कराना रहा। कार्यशाला के द्वितीय दिवस के प्रात कालीन सत्र की शुरुआत प्राचीन योग पद्धति के अंतर्गत वर्णित पट्कर्न अभ्यासों से हुई। प्रतिभागियों को चाल नेति, स्वर नेति, दड़ एंव वस्त्र घोती का प्रत्यक्ष अभ्यास कराया गया। इन अभ्यांसो के माध्यम से शरीर की शुद्धि श्वसन संस्थान की मजबूती और मानसिक एकाग्रता के लाभों पर विस्तार से चर्चा हुई।
पट्कर्म का अभ्यास प्रख्यात योगाचार्य डॉ लक्ष्मी नारायण जोशी के निर्देशन में हुआ एवं उनके सहयोगी के रूप मे राजेंद्र नौटियाल योग प्रशिक्षक उ० सं० कि० वि० उपस्थित रहे। डॉ लक्ष्मी नारायण जोशी ने बताया कि किस प्रकार नेति क्रिया नाक एवं श्वसन मार्ग को शुद्ध कर रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है। हर वस्त्र धोती पाचन तंत्र को सक्रिय बनाता है तथा दढ क्रिया से शरीर में स्फूर्ति आती है। उन्होंने कहा कि ज़ीवनशैली की व्यस्तताओं के बीच इन शुद्धि क्रियाओं का अभ्यास अत्यंत आवश्यक है। दूसरे सत्र में विश्वविद्यालय के क्रीडा अधिकारी डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने खेल, जीम एवं योग विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिम्नेजियन एक आधुनिक व्यायाम पद्धतियों यदि योगाभ्यास के साथ जुड़ती है तो व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को दोगुना लाभ पहुँचता है। डॉ शर्मा ने खेल और योग को परस्पर पूरक बताते हुए कहा कि दोनों ही विधाएँ शारीरिक क्षमता बढ़ाने के साथ अनुशासन एवं संतुलन का विकास करती है।
इस अवसर पर डीन एकेडमिक, देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रख्यात विद्वान प्रोफेसर ईश्वर भारद्वाज ने उत्तराखंड महाविद्यालयो में नवयुक्त योग प्रशिक्षकों का योग के दायित्व विषय पर विस्तृत वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा सस्थानों में योग को पाठ्यक्रम एवं सह -पाठ्यक्रम दोनों रूपों में अपनाया जाना चाहिए। योग केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह जीवन शैली का अंग है जो विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, धैर्य और सकारात्मक सोच का निर्माण करता है। उन्होंने नवयुक्त पीढ़ी की ओर संकेत करते हुए कहा कि यदि युवा वर्ग योग से जुड़ेगा तो समाज और राष्ट्र दोनों स्वस्थ और सशक्त बनेंगे।
सयुक्त निदेशक, उच्च शिक्षा उत्तराखंड प्रोफेसर ए. एस उनियाल ने महाविद्यालय एवं समाज ने योग प्रशिक्षकों का योगदान’ विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि योग प्रशिक्षक न केवल विद्यार्थियों को शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए प्रेरित करते है, बल्कि समाज में जागरूकता लाने का भी महत्वपूर्ण कार्य करते है। महाविद्यालय में योग शिक्षा से अनुशासन एकायता और संस्कारों का विकास होता है। उन्होंने यह भी कहा कि आज की बदलती जीवनशैली में योग प्रशिक्षको का कार्य एक सामाजिक आदोलन के समान है, जो तनाव, अवसाद और रोगों से लड़ने में सहायक है।
समापन सत्र में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के मान्य कुलपति, प्रो० दिनेशचन्द्र शास्त्री, ने कहा कि आप सभी योग प्रशिक्षक सीखी गई विधियों को अपने जीवन में अपनाएँगे और समाज तक पहुँचाएँगे। दो दिवसीय इस कार्यशाला का औपचारिक समापन घोषणा करते हुए सभी प्रतिभागियों को वि० वि० के मान्य कुलपित, प्रो० ए०एस० उनियाल, संयुक्त उच्चा शिक्षा, कुलसचिव, उपकुलसचिव एवं नोडल अधिकारी डॉ लक्ष्मीनारायण जोशी की उपस्थिति में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए तथा विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके सक्रिय सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में डी चन्द्रशेखर शर्मा, राजेन्द्र प्रसाद नौटियाल, डॉ० मोहित कुमार, शोरभ शर्मा, दिशान्त शर्मा, जगदीश प्राण्डेय, अजीत राजपुत, कुछ अकिता धीमान, दिया यादव, गौरी वशीका, कृष्णदेव, मानसी, निश्की, शिवानी, भूमिका, योगेश, शुभव मिश्रा, ऋतिक, पीयुष मलिक आदि उपस्थित रहे l
उल्लेखनीय है कि उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने बीते कल देर सांय किया था l इस प्रशिक्षण कार्य क्रम मैं प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले परीक्षार्थियों को विभिन्न स्कूल कालेजों में नियुक्तियाँ मिली हैं जो अब वहां छात्रों को योग का प्रशिक्षण देंगे l




