इ एम ए के तत्वावधान में बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिकल साइंस एंड कैंसर रिसर्च सेंटर अलीपुर में विश्व हिपेटाइटिस दिवस पर यकृतशोथ सहित लीवर रोगों की जागरूकता व निदान एवं चिकित्सा विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गयी। संगोष्ठी में वक्ताओं ने यकृत के विभिन्न बीमारियों के कारण, बचाव एवं इलाज पर अपने विचार व्यक्त किये।
इस अवसर पर डा. चौहान ने कहा कि यकृत मे सूजन आने को हिपेटाइटिस कहते हैं यह वायरस के संक्रमण से होता है यह तीन प्रकार का होता हैं- हिपेटाइटिस ए, हिपेटाइटिस बी, और हिपेटाइटिस सी, । हिपेटाइटिस बी टाईप अधिक संक्रामक एवं फैलने वाला होता है। इसमें रोगी को भूख की कमी, पेट, चेहरे व पैरों पर सूजन आ जाती है त्वचा का पीला पड़ना, आंखों में पीलापन आना, मूत्र पीले रंग का आना, शारीरिक कमजोरी, थकावट, जी मिचलाना, वमन आना, आदि लक्षण दिखाई देते हैं। यकृत रोग- हिपेटोमैगेली , यकृतशोथ , सिरहोसिस आफ लीवर, लीवर सिस्ट, ट्यूमर इन लीवर, लीवर का बढ़ना, कार्सिनोमा आफ लीवर, प्रमुख हैं। शराब अधिक और लगातार पीने से भी लीवर खराब होता है। डॉ. चौहान ने कहा कि अधिक स्पाइसी फूड, शराब का सेवन से परहेज़ करना चाहिए। लीवर रोग झाड़ फूंक से कभी ठीक नहीं होगा। व्यक्ति को अपने दैनिक भोजन में पत्ता गोभी, फूल गोभी, ब्रोकली, नींबू पानी, हल्दी, लहसुन, चुकंदर, गाजर, सेब, अखरोट का उपयोग करने से कभी लीवर रोग नही होगा।
डॉ. चौहान ने बताया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए आइ ) एंड रैटिनल स्केनिंग डायग्नोसिस से लीवर रोग ग्रसित होने से पूर्व ही पता चल जाता है। यकृत रोगों में इ एच एडवांस सपेजरिक मेडिसिन- लिवोम, अत्यधिक प्रभावशाली है।
संगोष्ठी में डॉ. वी एल अलखनिया, डॉ. ऋचा आर्या, डा. हीना कुशवाहा, एम टी अंसारी, डा. अमर पाल अग्रवाल, डॉ. बी बी कुमार, डॉ. हरबंश सिंह, अशोक कुशवाहा, डॉ. गुलाम साबिर, डॉ. चांद उस्मान, डॉ. अर्सलान , डा.आदेश शर्मा , डॉ.सुरेंद्र कुमार, डॉ.सुबोध चौहान, रुद्राक्षी, संतोष सिसोदिया आदि उपस्थित रहे।




