देश भर के पत्रकारों की उठी एक ही आवाज़: पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करो, सच्चाई पर हमले बंद करो।
लक्सर उत्तराखंड निष्पक्ष रिपोर्टिंग और खोजी पत्रकारिता (Investigation) करने वाले पत्रकारों पर बढ़ते हमलों तथा बदसलूकी और गैर-कानूनी हिरासत (Detention) की घटनाओं को लेकर देश भर के मीडिया जगत में भारी आक्रोश व्याप्त है चाहे बड़ा मीडिया हाउस हो या , क्षेत्रीय समाचार पत्र हों या फिर यूट्यूब और डिजिटल प्लेटफॉर्म के छोटे पत्रकार सभी ने एकजुट होकर सरकार से ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ (Journalist Protection Act) को तुरंत लागू करने की मांग की है जिसमें पत्रकार संगठनों का कहना है कि आज सच्चाई दिखाने वाले पत्रकारों को डराने और चुप कराने के लिए झूठे मुकदमे, पुलिस की बदसलूकी और शारीरिक हिंसा का सहारा लिया जा रहा है। इस डर के माहौल को समाप्त करने के लिए अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि कठोर कानूनी ढांचा चाहिए जिसमें आज पत्रकार संगठन एकजुट होकर उठाई गई प्रमुख मांगें: जो सरकर को मनानी चाहिए और
झूठे मुकदमों (SLAPP Cases) पर तुरंत रोक तथा रिपोर्टिंग के कारण दर्ज होने वाले मामलों की जांच कम से कम एसपी (SP) स्तर के अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना न हो जिसमें बदसलूकी और हिंसा पर सख्त कार्रवाई: पत्रकारों पर हमला करने, उन्हें हिरासत में लेने या धमकी देने वालों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज हो और इन मामलों का निपटारा फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) में 6 महीने के भीतर किया जाए।स्रोतों (Sources) की गोपनीयता का अधिकार: किसी भी पत्रकार को पुलिस या प्रशासन द्वारा उसके स्रोत उजागर करने के लिए बाध्य न किया जाए।
फ्रीलांस, स्ट्रिंगर्स और छोटे पत्रकारों की आर्थिक सुरक्षा: सभी पत्रकारों के लिए न्यूनतम वेतन, लिखित अनुबंध और अनिवार्य जीवन व स्वास्थ्य बीमा का प्रावधान हो।
पत्रकार कल्याण कोष (Welfare Fund): संकट के समय, कानूनी लड़ाई या दुर्घटना की स्थिति में पत्रकार और उसके परिवार को तुरंत आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। सच्चाई की सुरक्षा ही लोकतंत्र की सुरक्षा है जिसमें
मीडिया बिरादरी के प्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक गांव, ब्लॉक और ज़िला स्तर पर काम करने वाले हर पत्रकार को सुरक्षा का कानूनी अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक निष्पक्ष पत्रकारिता सुरक्षित नहीं रह सकती। देश के सभी छोटे-बड़े पत्रकारों ने एक सुर में सरकार से इस ऐतिहासिक बिल को संसद और विधानसभाओं में पास कराने की अपील की है। और एकजुटता का संदेश:दिया
पत्रकारिता कोई अपराध नहीं है। आइए, अपने अधिकारों और सुरक्षा के लिए एक साथ आएं और ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ के निर्माण के लिए आवाज़ बुलंद करें! ऑल इंडिया पत्रकार एकता एशोसीएशन उत्तराखंड




