दलितों, वंचितों और अल्पसंख्यकों का शोषण बर्दाश्त नहीं होगा: डॉ. सुरेंद्र कुमार बौद्ध
खातेगांव (देवास, मध्य प्रदेश)। दलित-मुस्लिम एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र कुमार बौद्ध ने कहा कि देश में दलितों, वंचितों, पिछड़ों, महिलाओं, युवाओं, अल्पसंख्यकों और समाज के गरीब वर्गों का शोषण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इन सभी वर्गों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करना मंच की पहली प्राथमिकता है।
यह बात उन्होंने मध्य प्रदेश के देवास जिले के खातेगांव नगर पालिका स्थित सामुदायिक भवन में आयोजित राष्ट्रीय पदाधिकारी सम्मान समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम का आयोजन मंच के प्रदेश अध्यक्ष हाजी इकबाल पठान और प्रदेश प्रधान महासचिव डॉ. कमलेश वर्मा ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हाजी इकबाल पठान ने की।
डॉ. सुरेंद्र कुमार बौद्ध ने कहा कि दलित-मुस्लिम एकता मंच देश के प्रत्येक राज्य में भाईचारा बढ़ाने और समाज के वंचित वर्गों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाएगा। इसके माध्यम से सभी वर्गों को एक मंच पर लाने और आपसी एकता मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि समाज में भाईचारा और एकता स्थापित करके ही वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी प्रयास किए जा सकते हैं।
देवास पहुंचने पर जगह-जगह हुआ स्वागत
कार्यक्रम में शामिल होने से पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र कुमार बौद्ध का देवास जिले में विभिन्न स्थानों पर स्वागत किया गया। परिणय वाटिका, देवास और सोनकच्छ में एशियाड ग्रुप के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। वहीं, प्रोग्रेसिव पेंशनर के अध्यक्ष प्रहलाद बिजोनिया के नेतृत्व में महाराणा प्रताप सिंह चौक पर सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने पुष्पहार पहनाकर उनका अभिनंदन किया।
खातेगांव नगर पालिका के बस स्टैंड पर प्रदेश प्रधान महासचिव डॉ. कमलेश वर्मा के नेतृत्व में ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया गया। इसके अलावा जिले में कई अन्य स्थानों पर भी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने उनका अभिनंदन किया।
कई पदाधिकारियों ने किया संबोधित
सम्मान समारोह में राष्ट्रीय मुख्य सलाहकार सैयद इकराम अली, राष्ट्रीय महासचिव नाजिम साबरी, प्रदेश अध्यक्ष हाजी इकबाल पठान, प्रदेश प्रधान महासचिव डॉ. कमलेश वर्मा सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में सामाजिक एकता, भाईचारे और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया गया।




