पृथ्वी बचाओ, प्लास्टिक से गमला बनाओ!रिलैक्सो ने लक्सर के 41 सरकारी स्कूलों में मनाया विश्व पृथ्वी दिवस, बच्चों ने कचरे को किया कमाल लक्सर विश्व पृथ्वी दिवस के मौके पर रिलैक्सो फुटवियर्स की परिवर्तन आदर्श विद्यालय परियोजना ने एक बार फिर पर्यावरण संरक्षण का अनोखा मॉडल पेश किया। कंपनी की सहयोगी संस्था ममता एच.आई.एम.सी. के माध्यम से लक्सर ब्लॉक के 41 शासकीय विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ों छात्रों ने उत्साह से भाग लिया और साबित कर दिया कि कचरा भी सही हाथों में पड़ जाए तो चमत्कार बन सकता है।कार्यक्रम में बच्चों ने “वेस्ट टू वंडर” प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया। प्लास्टिक की खाली बोतलों, पुरानी बाल्टियों और अन्य अनुपयोगी सामग्री से उन्होंने खूबसूरत फूलों के गमले, आकर्षक कूड़ेदान और अन्य उपयोगी सामान तैयार किए। इन रचनात्मक उत्पादों का उपयोग स्कूलों में पौधारोपण के लिए भी किया गया, जिससे बच्चों को न सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान, बल्कि व्यावहारिक अनुभव भी मिला। इसके अलावा, गांवों की दीवारों पर रंग-बिरंगे नारों और संदेशों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की मुहिम चलाई गई।पृथ्वी बचाओ कल का भविष्य बचाओ प्लास्टिक कम पेड़ ज्यादा” जैसे आकर्षक नारे दीवारों पर चमक रहे थे, जो पूरे समुदाय को जागरूक करने का काम कर रहे हैं।रिलैक्सो फुटवियर्स के सीएसआर प्रमुख श्री गंभीर अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा,“ऐसे कार्यक्रमों का मकसद बच्चों और समुदाय को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराना है। जब बच्चे खुद कचरे को उपयोगी चीज में बदलते हैं, तो उनमें पृथ्वी संरक्षण की भावना स्वाभाविक रूप से विकसित होती है। हम चाहते हैं कि हर बच्चा सक्रिय रूप से इस मुहिम में शामिल हो।”खंड शिक्षा अधिकारी श्री विनोद कुमार शाह ने कहा कि ऐसे प्रयास छात्रों और समुदाय दोनों में सकारात्मक बदलाव लाते हैं। वहीं, मुख्य शिक्षा अधिकारी, हरिद्वार श्री नरेश कुमार हल्दियान ने इसे सराहते हुए कहा कि विद्यालयों में ऐसी गतिविधियां बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं।यह आयोजन रिलैक्सो की परिवर्तन आदर्श विद्यालय परियोजना का हिस्सा है, जिसके तहत कंपनी हरिद्वार जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण जागरूकता को भी बढ़ावा दे रही है।पृथ्वी दिवस पर यह छोटा-सा प्रयास बड़ा संदेश दे गया —अगर हम आज कचरे को समझदारी से इस्तेमाल करें, तो कल हमारी पृथ्वी और हरी-भरी रह सकेगी।




