उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग एवं पंचगव्य समिति द्वारा श्री राम नवमी एवं चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर एक भव्य सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवरात्रि से जुड़े महिला सशक्तिकरण के संदेश को प्रसारित करना था।कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. प्रकाश चंद्र पंत ने की। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि नवरात्रि केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि नारी शक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण का प्रतीक है। समाज में महिलाओं की भूमिका को सुदृढ़ करने के लिए इस प्रकार के आयोजनों का विशेष महत्व है।डॉ. सुमन प्रसाद भट्ट ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों के साथ-साथ नवरात्रि में पूजित नवदुर्गा हमें शक्ति, साहस और आत्मविश्वास की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश दिया।कार्यक्रम में श्रीमती मीनाक्षी सिंह रावत सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए और नारी सशक्तिकरण के महत्व पर प्रकाश डाला।विशेष रूप से छात्रा-अध्यापिकाओं—मीनाक्षी, सुमन, वंदना, सीमा, रितिका एवं खुशी—ने नवदुर्गा के विभिन्न रूपों के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। उनके वक्तव्यों ने उपस्थित जनसमूह को अत्यंत प्रभावित किया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित श्रीमान विनोद भंडारी जी (प्रिंसिपल, दून पब्लिक स्कूल) ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में सांस्कृतिक चेतना, नैतिक मूल्यों और आत्मविश्वास का विकास करते हैं।कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया तथा समापन शांति पाठ के साथ हुआ।




