पंतित पुष्पराज धीमान
गोमुख से निकली पहचान मिली हरिद्वार से
दर्शन करने आते है जिसके सारे ही संसार से
तुम भी आकर डुबकी लगा लो
वरना रह जाओगे उद्धार से
ब्रह्मा के कमंडल से निकली तो रूप विकराल बनाया
शिव की जटाओं को मैया तूने अपना ससुराल बनाया
धरती पर आई मैया
भागीरथ तेरी पुकार से
तुम भी आकर डुबकी लगा लो
वरना…………
तेरे ही जल से मां हम कांवड़ भर लाते हैं
खुश होते शंकर जब उनको जल चढ़ाते हैं
तेरी ही कृपा से मैया
लोग जुड़े हुए रोजगार से
तुम भी आकर डुबकी लगा लो
वरना……,
जीवन के खातिर मैया अमृत तेरा पानी है
तेरी महिमा को जो ना जाने सबसे बड़ा अज्ञानी है
मेरा तो परलोक भी सुधरे
मां तेरे ही उपकार से
तुम भी आकर डुबकी लगा लो
वरना………..
तेरा पानी पीकर धरती भी हरी-भरी हो जाती है
काशी तक जाते-जाते 4 नदियां मिल जाती हैं
धर्म-कर्म के मौके परआचमन करते
मैया तेरे ही जलधार से
तुम भी आकर डुबकी लगा लो
वरना रह जाओगे उद्धार से
पं पुष्पराज धीमान भुलक्कड़
गांव नसीरपुर कला हरिद्वार




