रिपोर्ट महिपाल शर्मा l
टेक्नोलॉजी के माध्यम से होगा संस्कृत का प्रचार : प्रो. दिनेश चंद्र शास्त्री
उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार द्वारा ‘‘उत्तराखण्ड प्रदेश के परम्परागत संस्कृत शिक्षकों एवं छात्रों हेतु तकनीकी प्रशिक्षण’’ विषयक द्विवर्षीय प्रोजेक्ट के अन्तर्गत पंचदिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला द्वितीय चरण का संपूर्ति सत्र आयोजित किया गया।
संपूर्ति सत्र का शुभारम्भ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेशचन्द्र शास्त्री तथा मुख्य अतिथि उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुनील कुमार जोशी ने संयुक्त रूप से किया।
मुख्य अतिथि प्रो. सुनील कुमार जोशी ने कहा कि संस्कृत जितनी प्राचीन भाषा है उतनी ही आधुनिक भाषा भी है। संस्कृत में विद्यमान विज्ञान संसार का सबसे महानतम विज्ञान है जिसे तकनीकी के माध्यम से दुनिया के सामने लाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संस्कृत आयुर्वेद की भाषा है जिसे आधुनिक तकनीक के माध्यम से सामने लाया जा सकता है। पूरा विश्व आज आयुर्वेद को संस्कृत भाषा के माध्यम से जानना चाहता है इसलिए यह आवश्यक है कि संस्कृत विश्वविद्यालय इस ओर भी प्रयास करे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में शिक्षा प्रदान करने का माध्यम तकनीक होगी, इसलिए उत्तराखंड के सुदूर क्षेत्रों में स्थित विद्यालयों के शिक्षकों को प्रशिक्षित करना भी आवश्यक है। आज जब वैज्ञानिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ऊपर काम कर रहे हैं तो यह देखा गया है कि इसमें संस्कृत व्याकरण का महत्वपूर्ण योगदान है। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय का यह दायित्व है कि संस्कृत के विद्वानों एवं संगणक वैज्ञानिकों का संयुक्त दल बनाकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काम कर पूरे संसार को लाभान्वित करें। उन्होंने कहा अधिकांश वैज्ञानिक संस्कृत सीखना चाहते हैं इसलिए संस्कृत विश्वविद्यालय को एक ऐसा ऑनलाइन प्लेटफार्म बनाना चाहिए जिसके माध्यम से विदेशी विद्वान भी आसानी से संस्कृत सीख सकें।
कार्यक्रम के अध्यक्ष उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेशचंद्र शास्त्री ने कहा कि संस्कृत ज्ञान एवं विज्ञान की भाषा है। इस भाषा में वैदिक वांङ्मय से लेकर आधुनिक संस्कृत साहित्य विद्यमान है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में संस्कृत शिक्षा को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है, तदनुरूप ही प्रदेश के समस्त संस्कृत शिक्षकों एवं छात्र/छात्राओं को आधुनिक शिक्षण एवं संप्रेषण तकनीकी में प्रशिक्षित करने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा इस कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। कुलपति ने कहा इस प्रोजेक्ट को केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली द्वारा अनुदान दिया गया है। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के द्वारा ई लर्निंग प्लेटफार्म विकसित किया जा रहा है जिसके माध्यम से सुदूर क्षेत्रों के विद्यार्थी भी विद्वान शिक्षकों के व्याख्यान का लाभ उठा सकेंगे।
कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय पूरे प्रदेश में संस्कृत शिक्षकों को प्रशिक्षित कर रहा है जिससे अधिकतम लोगों को तकनीकी के माध्यम से संस्कृत सिखाई जा सके।
कार्यशाला के सह समन्वयक सुशील चमोली ने बताया कि कार्यशाला में राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से 47 प्रतिभागी इस कार्यशाला में प्रतिभाग कर रहे हैं। पांच दिवसीय कार्यशाला में कुल 15 सत्र आयोजित किए गए जिसमें देश के विभिन्न विद्वानों द्वारा प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय के परियोजना प्रभारी डा. सुमन प्रसाद भट्ट ने किया।
इससे पूर्व मंगलाचरण वेद विभाग के अध्यक्ष डा. अरुण कुमार मिश्र ने किया।
अतिथियों का स्वागत कार्यशाला की संयोजक मीनाक्षी सिंह रावत ने किया।
इस अवसर पर प्रो. दिनेश चन्द्र चमोला, डॉ. विन्दुमती द्विवेदी, परमानंद शर्मा, प्रमोद गौड़, नीमा शर्मा, डा. अजीत प्रकाश नवानी, प्रियदर्शिनी औली, विपिन उनियाल, मनोज गहतोड़ी, विभिन्न संस्कृत महाविद्यालयों के प्राचार्य, शोधार्थी एवं छात्र उपस्थित रहे।



