google की छोड़ी नौकरी, AAP की बनी पार्षद, अब दंगा भड़काने में आप नेता निशा सिंह को 7 साल की सजा, 10 हजार जुर्माना l
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आम आदमी पार्टी की पूर्व पार्षद निशा सिंह ने मुंबई विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग में डिग्री ली, इसके बाद निशा ने लंदन बिजनेस स्कूल से MBA भी किया, अपनी पढ़ाई के बाद वे भारत लौटीं और गूगल जैसी बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी में नौकरी की।
कुछ दिन गूगल में काम करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और राजनीति में आ गई। साल 2011 में निशा ने निर्दलीय गुरुग्राम नगर निगम का चुनाव लड़ा और वे वार्ड नंबर 30 से पार्षद बन गईं और इसके बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर ली।
अब गुरुग्राम से आम आदमी पार्टी की पूर्व पार्षद निशा सिंह को कोर्ट ने 7 साल की सजा सुनाई है। निशा पर साल 2015 में भीड़ को भड़काने का आरोप सिद्ध हुआ है।
अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश मोना सिंह ने गुरुवार को सुनवाई के बाद मामले में फैसला सुनाया है, 17 आरोपियों में से 7 पर विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। निशा सिंह को आईपीसी की धारा 114 के तहत भी दोषी ठहराया गया है।
बता दें कि इस भीड़ ने पुलिस और अतिक्रमण हटाने गई हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की टीम पर हमला कर दिया था। हमले में ड्यूटी पर तैनात मजिस्ट्रेट और 15 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
माननीय अदालत ने इस केस में निशा सिंह समेत 17 लोगों को 7 से 10 साल की सजा सुनाई है, जिसमें 10 महिलाएं हैं। निशा सिंह के अलावा घटना में शामिल सभी ग्रामीण महिलाएं हैं।
अदालत ने निशा सिंह समेत सभी 10 महिलाओं पर 10-10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है, वहीं अन्य 7 लोगों पर 20-20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।
अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि अगर कोई आरोपी जुर्माना नहीं देता है तो उसकी सजा 2-3 साल के लिए बढ़ा दी जाएगी।
यह मामला 15 मई 2015 का है, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की टीम पुलिस टीम के साथ सेक्टर-47 झिमर बस्ती में अतिक्रमण हटाने पहुंची, आदेश के अनुसार वकील खजान सिंह, प्रदीप जैलदार और निशा सिंह ने भीड़ को टीम पर हमला करने के लिए उकसाया।
इसके बाद भीड़ ने प्राधिकरण और पुलिस टीमों पर पत्थर, पेट्रोल बम और एलपीजी सिलेंडर फेंके। इस घटना में एक ड्यूटी मजिस्ट्रेट और 15 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश मोना सिंह ने गुरुवार को सुनवाई के बाद मामले में फैसला सुनाया। 2015 के इस केस में कुल 19 आरोपी थे। वहीं 7 साल तक चली मामले की सुनवाई के दौरान दो आरोपियों रमेश और रतनलाल की मौत हो गई। बाकी 17 आरोपियों में से 7 पर विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। वहीं निशा सिंह को आईपीसी की धारा 114 के तहत भी दोषी ठहराया गया।



