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श्रावणी उपाकर्म के साथ आयोजित हुई संस्कृत संगोष्ठी l

श्रावणी उपाकर्म के साथ आयोजित हुई संस्कृत संगोष्ठी l

रिपोर्ट महिपाल शर्मा l

उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में श्रावणी उपाकर्म के साथ संस्कृत सप्ताह की शुरुआत की गई। द्वितीय दिवस पर आयोजित संस्कृत संगोष्ठी में विशिष्ट वक्ता सेवा निवृत्त भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी डा. अनिल कुमार मिश्र ने कहा कि संस्कृत भाषा में हमारी संस्कृति है, संपूर्ण संगीत शास्त्र संस्कृत भाषा एवं वेद से ही निकला है | भारत की भूमि पर जो कुछ भी है वह सब कुछ संस्कृत में है, जो संस्कृत में नहीं है वह इस धरा पर भी नहीं है | कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डा भोला झा ने कहा कि संस्कृत भाषा एक परिष्कृत तथा विश्व की प्रथम भाषा होने के कारण सभी भाषाओं की जननी है | भारत वर्ष आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है अतः इस संस्कृत भाषा का भी विशेष महत्व है | कार्यक्रम के अध्यक्ष तथा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो देवी प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत भाषा जन भाषा बने ऐसा प्रयास किया जाना चाहिए | कार्यक्रम का शुभारंभ वेद विभाग के छात्रों के वैदिक मंगलाचरण से आरम्भ हुआ | धन्यवाद ज्ञापन डा सुमन प्रसाद भट्ट तथा संचालन डा बिन्दुमती द्विवेदी ने किया | संस्कृत सप्ताह का प्रारंभ प्रथम दिवस पर श्रावणी पूजा करके हुआ, जिसमें विश्वविद्यालय के आचार्य और छात्रों ने प्रेमनगर आश्रम घाट पर जाकर संस्कृत सप्ताह के संयोजक डा अरुण कुमार मिश्र के नेतृत्व में विधवत ढंग से किया गया | कार्यक्रम में डा. शैलेश कुमार तिवारी, डा दामोदर परगांई, डा धीरज शुक्ल, डा कंचन तिवारी, डा प्रकाश पंत, डा हरीश गुरुरानी, श्री सुशील चमोली, सहसंयोजक श्रीमती मिनाक्षी सिंह, कुलपति के निजी सचिव श्री मनोज गहतोडी़ और छात्र- छात्रों ने भाग लिया |

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