टैट अनिवार्यता और पुरानी पेंशन के मुद्दे पर मुख्यमंत्री से मिला शिक्षक-कर्मचारी प्रतिनिधिमंडल, सकारात्मक आश्वासन।
शिक्षकों के लिए टैट की अनिवार्यता समाप्त करने तथा पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को लेकर उत्तराखंड के शिक्षक-कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने दोनों महत्वपूर्ण मुद्दों को मुख्यमंत्री के समक्ष विस्तारपूर्वक रखा। टैट के मामले में मुख्यमंत्री की ओर से जल्द समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया गया।
उत्तरांचल स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन, हरिद्वार के जिलाध्यक्ष अश्वनी चौहान ने बताया कि 13 सितंबर को देहरादून के परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री आवास तक आयोजित पेंशन महारैली एवं घेराव कार्यक्रम में प्रदेशभर से शिक्षक-कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया था। आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि की ओर से संगठन के पदाधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर वार्ता के लिए आमंत्रित किए जाने का आश्वासन दिया गया था। इसी क्रम में सोमवार को मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए समय दिया।
अश्वनी चौहान के अनुसार, पुरानी पैंशन बहाली संगठन उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष जीतमणि पैन्यूली के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महामंत्री इंजीनियर मुकेश रतूड़ी, प्रदेश कोषाध्यक्ष इंजीनियर शांतनु शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, इंजीनियर जगमोहन सिंह रावत तथा देहरादून जिलाध्यक्ष संतोष गड़ोई सहित गढ़वाल मंडल अध्यक्ष विकास शर्मा , जिला अध्यक्ष हरिद्वार सुखदेव सैनी, जिला महामंत्री दीपक चौहान आदि अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।
अश्वनी चौहान ने बताया कि वार्ता के दौरान 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टैट की बाध्यता का विषय प्रमुखता से रखा गया। संगठन ने कहा कि आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टैट की अनिवार्यता से मुक्त किए जाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने इस विषय को गंभीरता से सुनते हुए जल्द समाधान की दिशा में रास्ता निकालने का आश्वासन दिया।
उन्होंने कहा कि शिक्षक समुदाय के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है और मुख्यमंत्री से मिले सकारात्मक आश्वासन से शिक्षकों में समाधान की उम्मीद जगी है।
पुरानी पेंशन बहाली पर भी हुई विस्तार से चर्चा!
प्रतिनिधिमंडल ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली का मुद्दा भी मुख्यमंत्री के समक्ष प्रमुखता से रखा। अश्वनी चौहान ने बताया कि प्रदेश के शिक्षक एवं कर्मचारी लंबे समय से पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली की मांग कर रहे हैं। 13 सितंबर की महारैली में भी यह मांग प्रमुख रही थी और प्रदेश के विभिन्न जिलों से शिक्षक-कर्मचारी इसमें शामिल हुए थे।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से कहा कि पुरानी पेंशन कर्मचारियों के भविष्य की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बात को गंभीरता से सुना तथा इस विषय पर आगे बातचीत एवं सकारात्मक पहल की दिशा में आश्वस्त किया।
जिलाध्यक्ष अश्वनी चौहान ने कहा कि संगठन का उद्देश्य शिक्षक एवं कर्मचारी हितों से जुड़े दोनों महत्वपूर्ण विषयों का लोकतांत्रिक एवं संवाद के माध्यम से समाधान कराना है। मुख्यमंत्री द्वारा प्रतिनिधिमंडल को समय देकर समस्याओं को सुनना तथा TET के विषय में सकारात्मक आश्वासन देना स्वागतयोग्य है। उन्होंने कहा कि संगठन आगे भी शिक्षकों और कर्मचारियों की मांगों को तथ्यों एवं मजबूती के साथ सरकार के समक्ष रखता रहेगा।




