पति पर जानलेवा हमला और महिला से अभद्रता का आरोप, कोर्ट पहुंची पीड़िता कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज
लक्सर मुंडाखेड़ा खुर्द निवासी एक महिला ने खंडजा कुतुबपुर निवासी 11 लोगों पर अपने पति के साथ जानलेवा हमला करने, उसे व उसके बच्चों तथा सास के साथ मारपीट करने और उसके साथ अभद्रता व छेड़छाड़ करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए महिला ने न्यायालय में बीएनएसएस की धारा 175(3) के तहत प्रार्थना पत्र देकर मुकदमा दर्ज कर जांच कराने की मांग की है।न्यायालय में दिए प्रार्थना पत्र के अनुसार, महिला का आरोप है कि उसके पति पवन कुमार का राजेंद्र सिंह से पिछले करीब पांच माह से विवाद चल रहा है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है। आरोप है कि 23 जुलाई को फोन के माध्यम से उसके पति को राजेंद्र सिंह के घर बुलाया गया। शाम करीब 4:30 बजे वह अपने पति, दो छोटे बच्चों और सास के साथ खंडजा कुतुबपुर पहुंची। महिला का आरोप है कि वहां राजेंद्र सिंह समेत अन्य आरोपी कथित तौर पर लाठी, लोहे की रॉड और चाकू लेकर पहुंचे और उसके पति पर हमला कर दिया शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हमले में पवन कुमार के पैर में लोहे की रॉड मारी गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। महिला ने एक आरोपी पर कंधे में कथित रूप से जहरीला इंजेक्शन लगाने और चेहरे पर हमला कर दांत तोड़ने का भी आरोप लगाया है। महिला के अनुसार, विरोध करने पर उसके साथ भी अभद्रता, मारपीट और कपड़े फाड़ने की कोशिश की गई। उसके बच्चों और सास के साथ मारपीट किए जाने तथा पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। महिला के मुताबिक, घटना के बाद पुलिस उन्हें उपचार के लिए लक्सर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंची, जहां पति की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया। शिकायत में कहा गया है कि घटना की तहरीर 24 जुलाई को लक्सर कोतवाली में दी गई थी। कार्रवाई नहीं होने पर 10 अगस्त को एसएसपी हरिद्वार को भी प्रार्थना पत्र भेजा गया, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। इसके बाद मंजूलता ने 17 अगस्त को न्यायालय में धारा 175(3) बीएनएसएस के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल कर राजेंद्र सिंह, मोहनलाल, बिजेंद्र, जुगेन्द्र, कपिल, शिवांश, देवांश, तुषार, राजू, शेखर और हरपाल सैनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। धारा 175(3) के तहत मजिस्ट्रेट पुलिस जांच का आदेश दे सकते हैं, हालांकि ऐसा आदेश न्यायालय के विवेक और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। खबर में लगाए गए आरोप न्यायालय में दाखिल प्रार्थना पत्र के आधार पर हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और मामले का अंतिम निष्कर्ष जांच/न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।




