सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम
हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार में ‘सेवा संकल्प अभियान-2026’ के अंतर्गत 17 सितंबर को2026 को ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय प्रांगण में वैदिक मंत्रों उच्चारण एवं दीप प्रज्वलन द्वारा किया गया। कार्यक्रम में माननीय कुलपति प्रो. रमाकांत पांडे, नोडल अधिकारी प्रो. बिंदुमति द्विवेदी, सह-नोडल अधिकारी श्रीमती मीनाक्षी सिंह रावत, निजी सचिव श्री मनोज गहतोडी सहित छात्र-अध्यापक, छात्र-अध्यापिकाएँ, विद्यार्थी एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर कुलपति प्रो. रमाकांत पांडे ने अपने आशीर्वचन में कहा कि सेवा भारतीय संस्कृति और संस्कारों का महत्वपूर्ण आधार है। सेवा केवल किसी व्यक्ति की सहायता करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में सेवा, संवेदना, सहयोग, अनुशासन एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से विद्यार्थियों को समाज से जोड़ते हुए उनमें ‘मैं’ से ‘हम’ की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने सामर्थ्य के अनुसार समाज के लिए कुछ न कुछ योगदान कर सकता है और छोटे-छोटे सेवा कार्य मिलकर बड़े सामाजिक परिवर्तन का आधार बन सकते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों से अभियान की गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता कर सेवा को संकल्प और संकल्प को व्यवहार में परिवर्तित करने का आह्वान किया। नोडल अधिकारी प्रो. बिंदुमति द्विवेदी ने अभियान की आगामी गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि ‘मेरा सपनों का भारत’ के अंतर्गत चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता, ‘सेवा कार्य’ के अंतर्गत नुक्कड़ नाटक एवं निबंध प्रतियोगिता तथा ‘सेवा—मेरा योगदान’ के अंतर्गत वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान एवं ‘लोकल फॉर लोकल’ जागरूकता रैली आयोजित की जाएगी। इसके अतिरिक्त ‘सेवा—मेरा संकल्प’, ‘सेवा के रंग’, ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ तथा ‘विकसित भारत @2047’ के अंतर्गत शिक्षण-जागरूकता, रंगोली, क्रीड़ा, योग-प्राणायाम एवं डिजिटल इंडिया विषयक ऑनलाइन व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। सह-नोडल अधिकारी श्रीमती मीनाक्षी सिंह रावत ने कहा कि अभियान विद्यार्थियों में सेवा-भावना, सामाजिक दायित्व, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं राष्ट्र निर्माण की चेतना विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों से अभियान की गतिविधियों में उत्साहपूर्वक सहभागिता का आह्वान किया। अभियान के सफल संचालन के लिए विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के आचार्य, सह-आचार्य एवं सहायक आचार्यों के सहयोग एवं दायित्व निर्धारण पर भी विचार-विमर्श किया गया।




