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दादूपुर-गोविंदपुर में भीषण आग, सात कबाड़खानों में राख हुआ लाखों का माल l

दादूपुर-गोविंदपुर में भीषण आग, सात कबाड़खानों में राख हुआ लाखों का माल l
ब्लॉक बहादराबाद क्षेत्र के दादूपुर-गोविंदपुर गांव में फिर से आग की भीषण घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया। शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे सात कबाड़ गोदामों में एक साथ आग लग गई, जिसने रिहायशी इलाकों को लपटों और धुएं से भर दिया।
दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंची, मगर आग इतनी विकराल थी कि घंटों मशक्कत के बाद भी उस पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका। लाखों का माल जल गया, लोगों की रात दहशत में कटी और अफरातफरी का आलम बन गया।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है इन कबाड़ गोदामों को रिहायशी इलाकों में बनाने की इजाज़त किसने दी?
इन गोदामों में पहले भी कई बार आग लग चुकी है, परन्तु आज तक इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कि गई वहीं इसे गोदाम क्षेत्र में लगातार खुलते ही जा रहे हैं जो जनता की जन जोखिम में डाल रहे हैं l

प्रशासन को सब पता, फिर भी आंखें क्यों मूंदे बैठा है?
इस सम्बन्ध में ग्रामीणों द्वारा जिला प्रशासन को ज्ञापन और शिकायतें दर्जनों बार भेजी गईं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इन अवैध इकाइयों की जानकारी दी गई।फायर विभाग को बताया गया कि बिना एनओसी के ये गोदाम चल रहे हैं।सीएम हेल्पलाइन से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक गुहार लगाई गई।
लेकिन इन सबके बावजूद न कोई जांच बैठी, न कोई गोदाम सील हुआ, न किसी को नोटिस मिला।
क्या यह प्रशासन की लाचारी है या लापरवाही?
क्या जिम्मेदार अधिकारी नतमस्तक हो चुके हैं अवैध कारोबार के आगे?

कबाड़खाने नहीं, मौत का जखीरा बन चुके हैं ये गोदाम
दादूपुर-गोविंदपुर जैसे रिहायशी इलाकों में खुलेआम चल रहे ये कबाड़ गोदाम अब विस्फोटक बन चुके हैं।
इनमें भरा होता है ज्वलनशील पदार्थ – जैसे: पुराने तेल के ड्रम
प्लास्टिक और रबड़ की बड़ी मात्रा,स्क्रैप लोहे के तीखे, भारी टुकड़े,बिना ढंकी और खुले में रखी बिजली की तारें जहाँ न कोई अग्निशमन यंत्र होता है, न कोई सुरक्षा व्यवस्था। एक छोटी सी चिंगारी भी पूरे मोहल्ले को तबाह कर सकती है। लेकिन प्रशासन को इसकी कोई चिंता नहीं।
फायर विभाग की चुप्पी – फॉर्मेलिटी से आगे क्यों नहीं?
दमकल विभाग को इन कबाड़खानों की स्थिति की पूरी जानकारी है। विभाग के अधिकारी कई बार यहां का निरीक्षण कर चुके हैं, लेकिन सिर्फ “कागजों” में कार्रवाई होती रही।

जब फायर एनओसी ही नहीं है, तो इन्हें चलने देने की अनुमति किसने दी?
क्या दमकल विभाग भी हादसे के बाद ही चेतता है?
इस बार की आग ने लोगों के गले तक आ चुके सब्र को तोड़ दिया है। लोगों ने स्पष्ट कहा है कि:

“हमने सभी विभागों को सूचित किया, लिखित शिकायत दी, यहां तक कि प्रधानमंत्री कार्यालय तक मेल और पत्र भेजा। लेकिन कार्रवाई किसी ने नहीं की। क्या किसी मौत के बाद ही सरकारी नींद खुलेगी?”

ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी जानबूझकर आँख मूंदे बैठे हैं। वे बार-बार चेतावनी देने के बावजूद हर बार मूकदर्शक बनकर खड़े रहते हैं।
क्या जिला प्रशासन की आंखें बंद हैं, या इरादे लचर हैं?
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड किसके दबाव में इन गोदामों को नजरअंदाज कर रहा है?
फायर विभाग किस नियम के तहत बिना एनओसी वाले गोदामों पर चुप्पी साधे बैठा है?
क्या पूरे तंत्र की संवेदनशीलता समाप्त हो चुकी है?
इन सवालों के जवाब न तो अधिकारी देते हैं, न कोई राजनीतिक प्रतिनिधि। लेकिन जनता अब जवाब चाहती है।

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