हरिद्वार में कांग्रेस पर दलित विरोधी राजनीति करने का आरोप
:अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर कांग्रेस की भूमिका पर उठाए सवाल, दुष्यंत कुमार गौतम के समर्थन में उतरी विश्व महापीठ
: दलित समाज के लोगों का सम्मान करने की नसीहत, कहा- न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद बार-बार मामले को उठाना उचित नहीं

हरिद्वार। शिरोमणि गुरु रविदास विश्व महापीठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरजीत सिंह ने कांग्रेस पर दलित विरोधी राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का दलित समाज के प्रति रवैया नया नहीं है। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और बाबू जगजीवन राम और कांशीराम के समय से ही कांग्रेस की नीतियों में दलित समाज के प्रति विरोध दिखाई देता रहा है। उन्होंने कहा कि दलित समाज के व्यक्ति को संवैधानिक पद पर जिम्मेदारी मिलने पर विरोध करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
शनिवार को हरिद्वार प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरजीत सिंह ने अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मामले में एसआईटी जांच के बाद सीबीआई जांच की मांग और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों को सामने रखा जा चुका है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली हाईकोर्ट से दुष्यंत कुमार गौतम को राहत मिली है और सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित दुष्प्रचार सामग्री को हटाने के निर्देश भी दिए गए थे। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद कांग्रेस इस मामले को राजनीतिक मुद्दा बना रही है।
सुरजीत सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अंकिता भंडारी के माता-पिता को राजनीतिक लाभ लेने के लिए उनको मोहरा बना रही है। उन्होंने कहा कि अंकिता पूरे देश की बेटी थी और उसके मामले में न्याय मिलना सभी की प्राथमिकता होनी चाहिए। लेकिन किसी भी परिवार की पीड़ा को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी वीआईपी की भूमिका को लेकर सवाल हैं तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। विश्व महापीठ भी वास्तविक दोषियों की पहचान और न्याय की प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि जांच में दुष्यंत कुमार गौतम का नाम सामने नहीं आने के बावजूद उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। सुरजीत सिंह ने राहुल गांधी सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से इस मामले को राजनीतिक रूप देने से बचने को कहा है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की सामाजिक छवि खराब करने के बजाय तथ्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर बात होनी चाहिए।




