आत्मरक्षा कार्यशाला के चौथे दिन छात्र अधिष्ठाता प्रो. लक्ष्मी नारायण जोशी ने किया निरीक्षण, पंचिंग की सूक्ष्म तकनीकों से कराया अवगत lबहादराबाद5 फरवरी ( महिपाल ) उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के महिला प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित साप्ताहिक आत्मरक्षा कार्यशाला के चौथे दिन प्रशिक्षण सत्र तकनीकी दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण एवं प्रभावशाली रहा। आज के सत्र में आत्मरक्षा की सूक्ष्म तकनीकी बारीकियों, शरीर संतुलन, सही स्टांस तथा सटीक प्रतिक्रिया समय पर विशेष बल दिया गया।कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के छात्र अधिष्ठाता प्रो. लक्ष्मी नारायण जोशी ने कार्यशाला का निरीक्षण किया और प्रशिक्षण की गुणवत्ता की सराहना की। इस अवसर पर उन्होंने छात्राओं से संवाद करते हुए पंचिंग (मुक्का प्रहार) की विभिन्न तकनीकों के अंतर को सरल और व्यावहारिक रूप में समझाया। उन्होंने बताया कि पंचिंग में केवल बल नहीं, बल्कि सही कोण, कलाई की स्थिति, शरीर के भार का संतुलन और लक्ष्य की पहचान अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।अनुभवी आत्मरक्षा प्रशिक्षक श्री रविशंकर राय के कुशल मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को यह अभ्यास कराया गया कि किस प्रकार न्यूनतम ऊर्जा का उपयोग करते हुए प्रभावी रक्षा की जा सकती है। प्रशिक्षण के दौरान हाथ-पैर की स्थिति, दूरी बनाए रखने की कला तथा हमलावर की गति को समझकर प्रतिक्रिया देने की तकनीकों पर विस्तार से अभ्यास कराया गया।कार्यशाला में शारीरिक अभ्यास के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता, आत्मसंयम, सजगता और अनुशासन पर भी विशेष ध्यान दिया गया। विद्यार्थियों ने पूरे मनोयोग और उत्साह के साथ प्रशिक्षण में भाग लिया।महिला प्रकोष्ठ की नोडल अधिकारी डॉ. श्वेता अवस्थी ने कहा कि आत्मरक्षा कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल शारीरिक रूप से सक्षम बनाना नहीं, बल्कि उन्हें वैज्ञानिक सोच, आत्मविश्वास और विवेकपूर्ण निर्णय क्षमता से भी सशक्त करना है।वहीं महिला प्रकोष्ठ की सचिव मीनाक्षी सिंह रावत ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाता है और कार्यशाला की उपयोगिता को और अधिक प्रभावी बनाता है।कार्यशाला के आगामी सत्रों में इन तकनीकों को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ते हुए और अधिक उन्नत अभ्यास कराया जाएगा।




