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आत्मरक्षा कार्यशाला के तीसरे दिन एडवांस डिफेंस तकनीकों का अभ्यास जोड़ी बनाकर आत्मरक्षा करने की विधियों से विद्यार्थियों में टीम भावना और आत्मविश्वास का विकास

आत्मरक्षा कार्यशाला के तीसरे दिन एडवांस डिफेंस तकनीकों का अभ्यास जोड़ी बनाकर आत्मरक्षा करने की विधियों से विद्यार्थियों में टीम भावना और आत्मविश्वास का विकास उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के महिला प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित साप्ताहिक आत्मरक्षा कार्यशाला के तीसरे दिन प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत उत्साहपूर्ण एवं प्रभावशाली रहा। आज के सत्र में विद्यार्थियों को एडवांस डिफेंस तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें जोड़ी बनाकर आत्मरक्षा करने की तकनीकों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।हरिद्वार के अनुभवी आत्मरक्षा प्रशिक्षक श्री रविशंकर राय के कुशल मार्गदर्शन में छात्र-छात्राओं को यह सिखाया गया कि आपात परिस्थितियों में किस प्रकार आपसी समन्वय, सतर्कता और त्वरित प्रतिक्रिया के माध्यम से स्वयं तथा अपने साथी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। जोड़ी बनाकर किए गए अभ्यासों से विद्यार्थियों में न केवल शारीरिक दक्षता बल्कि टीम भावना और आपसी विश्वास का भी विकास हुआ।कार्यशाला के दौरान शारीरिक प्रशिक्षण के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता, अनुशासन, आत्मसंयम एवं सजगता पर भी विशेष बल दिया गया। विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और एकाग्रता के साथ प्रशिक्षण में भाग लिया, जिससे परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार देखने को मिला।कार्यशाला के आगामी दिनों में आत्मरक्षा से जुड़ी और भी उन्नत एवं व्यवहारिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।नोडल अधिकारी डॉ श्वेता अवस्थी ने बताया कि महिला प्रकोष्ठ का निरंतर प्रयास है कि विश्वविद्यालय परिसर को सुरक्षित, संवेदनशील और सशक्तिकरण-केन्द्रित बनाया जाए। आगामी सत्रों में और भी व्यावहारिक तथा उन्नत आत्मरक्षा तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे छात्राओं का आत्मविश्वास और अधिक सुदृढ़ हो सके।प्रकोष्ठ की सचिव मीनाक्षी सिंह रावत ने कहा कि कार्यशाला के प्रत्येक सत्र को इस प्रकार संरचित किया गया है कि छात्राएँ व्यावहारिक परिस्थितियों में स्वयं की रक्षा करना सीख सकें। महिला प्रकोष्ठ भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से छात्राओं के सर्वांगीण विकास और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण के निर्माण हेतु निरंतर प्रयासरत रहेगा।कराटे कोच श्री करूणा निधि पांडेय ने कहा कि कराटे केवल एक मार्शल आर्ट नहीं, बल्कि आत्मनियंत्रण, अनुशासन और मानसिक संतुलन का अभ्यास है। नियमित प्रशिक्षण से छात्राएँ न केवल शारीरिक रूप से सशक्त बनती हैं, बल्कि उनमें साहस, धैर्य और आत्मविश्वास भी निरंतर बढ़ता है।

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