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हरिद्वार में आज जेष्ट माह के कृष्ण पक्ष की सोमती अमावस्या पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़

रिपोर्ट महिपाल शर्मा l
हरिद्वार में आज जेष्ट माह के कृष्ण पक्ष की सोमती अमावस्या पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है l कोरोना काल की पाबंदियों के बाद चार धाम यात्रा और गंगा स्नान पर देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धांलु हरकी पौड़ी पर स्नान के लिए कल से ही आने लगे थे l आधी रात से ही जनता ने हरकी पौड़ी पर पवित्र दुबकी लगानी शुरू करदी थी l लाखो की संख्या में श्रद्धालु सोमती अमावस्या के स्नान का पुण्य कमा रहे हैं उस पर आज वट सावित्री वृत और दान करने वालो की भी हरिद्वार में भीड़ लगी हुई है l

सोमवती अमावस्या स्नान का हिंदुओं में विशेष महत्व माना गया है। यही कारण है कि पहले तो सोमवती अमावस्या और फिर सोमवार को ही इसके पड़ने से इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है इसलिए दूर-दूर से श्रद्धालु इस दिन गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य कमाना चाहते हैं, सोमवती अमावस्या के स्नान पर्व का विशेष महत्व माना जाता है।

सोमवती अमावस्या पर गंगा में स्नान करने के लिए गंगा तटों पर भीड़ लगती है। धर्मनगरी हरिद्वार में भी सोमवार आधी रात से ही गंगा स्नान करने के लिए हरकी पैड़ी पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। ज्योतिष गणना के मुताबिक, जब सोमवार के दिन अमावस्या पड़ती है तो उस दिन सोमवती अमावस्या कहलाती है। ज्योतिषियों के मुताबिक आज सोमवती अमावस्या पर एक खास योग बन रहा है, इस दिन गंगा स्नान के साथ जप, तप और दान का खास महत्व बताया गया है।

पं. विनोद कुमार शर्मा ने बताया कि जब भी कोई अमावस्या सोम युक्ता अर्थात सोमवार के दिन पड़ेगी तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। अमावस्या स्नान दान के लिए, पितरों के लिए बहुत ही पुण्य दाई होती है, इस दिन जो लोग अपने पितरों के निमित्त पूजा-अर्चना, दान इत्यादि करते हैं, उनके पित्र तृप्त रहते हैं और उनका घर धन-धान्य से भरा रहता है। आज के दिन वट सावित्री की पूजा का भी बहुत महत्व है। पति की लंबी आयु और घर में खुशहाली के लिए इस दिन महिलाएं वट की पूजा भी करती हैं, आज के दिन ही महिलाएं वट सावित्री का व्रत भी रखती हैं।

इस दिन जो मनुष्य पुरोहितों, ब्राह्मणों को दान इत्यादि करता है, वह उसके पितरों को तो प्राप्त होता है, साथ ही उसको भी उसका कई गुना फल मिलता है। यदि कोई आज के दिन गंगा स्नान करने आ नहीं सकता तो वह घर पर ही गंगा जी का ध्यान कर स्नान करें, तो उसे भी वही फल प्राप्त होता है, जो गंगा स्नान करके प्राप्त होता है।

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