अजीबो गरीब खेल माननीय न्यायालय को भी दूसरी बार करने पड़े जांच के आदेश। स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप।
लक्सर मे मामला स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा है। जहां 15 सितम्बर 2017 का है जिसमे पुलिस से की गई जांच पर सवाल उठाए गए हैं।माननीय न्यायालय में जांच को गलत बताते हुये।कोर्ट ने दुबारा जांच कर मुकदमा दर्ज करने के आदेश लक्सर पुलिस को दिया है। जिससे लक्सर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।हमने लक्सर तहसील पहुंचे पीड़ित मेनपाल सिंह से बात की उन्होंने बताया कि वह 15 सितंबर 2017 अपनी पत्नी को लेकर लक्सर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचा था। जहां रात्रि के दौरान डॉक्टर ने आने के लिए मना कर दिया ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स के द्वारा प्रसव कराया गया। सुबह 9:00 बजे प्रसूता की तबीयत अचानक खराब हो गई।जिसके बाद मौजूदा डॉक्टर शाक्य व महिला डॉक्टर सुषमा गुप्ता को तत्काल आने के लिए कहा गया। लेकिन दोनों ही डॉक्टर नहीं पहुंचे। और किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रसूता को इंजेक्शन लगा दिया गया।जिसके बाद प्रसूता को उल्टी होने लगी और उसकी हालत ज्यादा खराब हो गई।हालत बिगड़ती देख राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों ने जबरदस्ती बाहर निकाल दिया मेनपाल का कहना है।कि वह एक निजी अस्पताल में अपनी पत्नी को ले गए।जहां डॉक्टर ने प्रसूता का बचना नामुमकिन बताया और प्रसूता की मौत हो गई।मामले की तहरीर लक्सर कोतवाली पुलिस को दी गई।लेकिन सरकारी विभाग के खिलाफ कार्रवाई करने से मना करते हुए।लक्सर पुलिस ने तहरीर नहीं ली और मुझे माननीय न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।माननीय न्यायालय के आदेश पर लक्सर पुलिस को मुकदमा दर्ज करना पड़ा।लेकिन लक्सर पुलिस ने एक बार फिर अपने रसूख निभाये और उसके साथ अन्याय किया बेहद गम्भीर मामले में भी फाइनल रिपोर्ट लगाकर फाइल बंद कर दी। लेकिन मैंने हार नही मानी और एक बार फिर माननीय न्यायालय की शरण ली माननीय न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए।दूसरी बार जांच करने के आदेश जारी कर दिए हैं।जब हमने मैनपाल के अधिवक्ता मनोज कुमार प्रजापति से बात की तो उन्होंने बताया कि पुलिस की एफ आर के खिलाफ हमने प्रोटेस्ट लगाई।जिसे माननीय न्यायालय ने मंजूर किया और हमारी बात सुनने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए।दोबारा जांच के आदेश दिए हैं अब देखना है।कि पुलिस अपने रसूख निभाती है।या पीड़ित मैनपाल को इंसाफ देती है।




