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उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के एससी, एसटी, ओबीसी, पीडब्ल्यूडी एवं अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ एवं शिक्षाशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में डॉ. भीमराव अंबेडकर की “शिक्षा की वर्तमान शैक्षिक उपादेयता” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

lउत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के एससी, एसटी, ओबीसी, पीडब्ल्यूडी एवं अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ एवं शिक्षाशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में डॉ. भीमराव अंबेडकर की “शिक्षा की वर्तमान शैक्षिक उपादेयता” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन छात्राध्यापक प्रवीण चमोली द्वारा किया गया तथा शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो विंदुमती द्विवेदी ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन एवं विचारों पर बोलते हुए कहा कि शिक्षा ही सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। अंबेडकर जी के “शिक्षित, संगठित और संघर्ष” का मूलमंत्र आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक है।छात्राध्यापिका आरती ने कहा कि अंबेडकर जी का जीवन संघर्ष, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है, जिससे प्रत्येक विद्यार्थी को प्रेरणा लेनी चाहिए। प्रशांत, वैभव, दीपांशु, मनोज आदि—ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि समानता, सामाजिक न्याय और अधिकारों की स्थापना में शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। छात्राध्यापक जगदीश चंद्र ने कहा कि यदि जीवन में सफलता प्राप्त करनी है तो अंबेडकर जी के आदर्शों को अपनाना आवश्यक है। विभागाध्यक्ष डॉ प्रकाश चन्द्र पंत ने कहा कि विद्यार्थियों को अम्बेडकर जी के जीवन से प्रेरणा लेकर शिक्षित बनने और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का संदेश दिया। अंत में संयोजक श्रीमती मीनाक्षी सिंह रावत ने कहा कि अंबेडकर जी ने देश के प्रत्येक वर्ग को आगे बढ़ाने का कार्य किया, इसलिए हमें उनके आदर्शों को अपनाकर शिक्षा के माध्यम से स्वयं और समाज का विकास करना चाहिए। सुमन, स्नेहा, भरत, हिमांशु जोशी, सुभाष, पवन, नितिन, इत्यादि कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

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