स्मार्ट मीटर जनहित में घातक: चौधरी शाह आलम ने बैन की मांग की, बड़े आंदोलन की चेतावनी पश्चिमी यूपी में किसान संगठनों का संयुक्त मोर्चा, जबरन मीटर लगाने पर रोक की मांग मुज़फ्फर नगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्मार्ट बिजली मीटर के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। भारतीय मजदूर संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाह आलम ने आज कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि स्मार्ट मीटर आम जनता के लिए घातक साबित हो रहा है। उन्होंने उत्तराखंड और राजस्थान की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी इस योजना को पूरी तरह बैन करने की मांग की। चौधरी शाह आलम ने आरोप लगाया कि मीटर लगने के बाद बिजली बिलों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है, जिससे किसान, मजदूर और गरीब उपभोक्ता भारी आर्थिक बोझ तले दब गए हैं। “यह जबरन थोपी जा रही योजना है। बढ़ते बिलों से जनता परेशान है। अगर सरकार ने तुरंत नहीं रोका तो संयुक्त किसान क्रांति मोर्चा के बैनर तले सैकड़ों संगठनों के साथ बड़ा आंदोलन शुरू होगा,” उन्होंने चेतावनी दी। मुजफ्फरनगर समेत पश्चिमी यूपी के कई गांवों में मीटर लगाने वाली टीमों और स्थानीय लोगों के बीच टकराव की घटनाएं बढ़ रही हैं। विभिन्न किसान संगठनों—भारतीय किसान मजदूर सर्व समाज संगठन, भारतीय किसान सर्वधर्म, भारतीय किसान यूनियन (चौधरी), भाकियू आंदोलनकारी आदि—ने संयुक्त मोर्चा बनाया है। इन संगठनों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक, जबरन इंस्टॉलेशन बंद करने और उपभोक्ताओं की सहमति के बिना कोई कार्रवाई न करने की मांग की है। उपभोक्ताओं की मुख्य शिकायतें हैं—बिलों में अचानक तीन-चार गुना वृद्धि, गलत रीडिंग, प्रीपेड मोड में जबरन शिफ्ट और बैलेंस न दिखने जैसी समस्याएं। केंद्र की RDSS योजना के तहत देशभर में करोड़ों स्मार्ट मीटर लग चुके हैं, लेकिन यूपी में विरोध सबसे ज्यादा है। हाल ही में सरकार ने 9 से 23 फरवरी तक ‘स्मार्ट मीटर पखवाड़ा’ आयोजित करने का निर्देश दिया है, जिसमें उपभोक्ताओं से फीडबैक लिया जाएगा। आपको बता दें कि स्मार्ट मीटरों को लेकर अन्य राज्यों में स्थिति है कि उत्तराखंड में शिकायतों के बाद नए मीटर इंस्टॉलेशन पर अस्थायी रोक लगी थी। राजस्थान ने नए कनेक्शन के लिए स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता हटा दी है। मध्य प्रदेश में अनिवार्यता की समयसीमा बढ़ाई गई है। सरकार का दावा है कि स्मार्ट मीटर से बिजली चोरी रुकेगी, बिलिंग पारदर्शी बनेगी और उपभोक्ता रीयल-टाइम खर्च ट्रैक कर सकेंगे। लेकिन विरोधियों का कहना है कि यह गरीबों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है। चौधरी शाह आलम ने सरकार से अपील की कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए योजना पर पुनर्विचार हो, वरना आंदोलन और तेज होगा। स्थिति पर सभी की नजर टिकी है—अगर विरोध बढ़ा तो यह राज्यव्यापी बड़ा मुद्दा बन सकता है।




