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रायघटी पुल पर सियासी घमासान: पूर्व राज्यमंत्री रविन्द्र आनंद ने धामी सरकार को घेरा, सांसद-सीएम के ‘भीतरी घात’ को ठहराया जिम्मेदार लक्सर

रायघटी पुल पर सियासी घमासान: पूर्व राज्यमंत्री रविन्द्र आनंद ने धामी सरकार को घेरा, सांसद-सीएम के ‘भीतरी घात’ को ठहराया जिम्मेदार लक्सर

लक्सर क्षेत्र के रामपुर रायघटी में गंगा नदी पर प्रस्तावित 107 करोड़ रुपये की लागत वाले पुल के निर्माण में हो रही देरी को लेकर पूर्व राज्यमंत्री रविन्द्र आनंद ने धामी सरकार पर तीखा हमला बोला है। आनंद ने इसे ‘सांसद और मुख्यमंत्री के भीतरी घात’ का परिणाम बताया और कहा कि स्थानीय जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग को राजनीतिक साजिश के तहत नजरअंदाज किया जा रहा है।रविवार को लक्सर स्थित हुकम सिंह के कार्यालय पर पूर्व राज्यमंत्री रविन्द्र आनंद ने कहा, “धामी सरकार सड़क-पुल निर्माण की बात तो करती है, लेकिन रामपुर रायघटी पुल का काम जानबूझकर रोका जा रहा है। यह सांसद और सीएम का भीतरी घात है। गंगा पार के सैकड़ों गांवों के लोग सालों से इस पुल का इंतजार कर रहे हैं। यूपी-उत्तराखंड की सीमा पर यह पुल न सिर्फ यातायात को आसान बनाएगा, बल्कि कृषि, व्यापार और पर्यटन को नई राह भी देगा। लेकिन सत्ता के अंदरूनी खेल में आम आदमी की पीड़ा को कुचला जा रहा है।आनंद ने आगे आरोप लगाया कि सर्वे, फिजिबिलिटी और डीपीआर के लिए 2 करोड़ 7 लाख रुपये का प्रस्ताव 2024 में ही भेजा गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। उन्होंने कहा, “सरकार का दावा है कि पुल 107 करोड़ में बनेगा, लेकिन हकीकत यह है कि सांसद और सीएम के बीच का गठजोड़ इसे रोक रहा है। लक्सर विधायक की बार-बार मांग के बावजूद सीएम धामी चुप्पी साधे हुए हैं। क्या यह जनता के साथ धोखा नहीं है?”रामपुर रायघटी पुल का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है। यह पुल गंगा पर बनने वाला महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है, जो उत्तराखंड के लक्सर, रुड़की क्षेत्र और उत्तर प्रदेश के कई गांवों को सीधा जोड़ेगा। पुल बनने से देहरादून-हरिद्वार-लखनऊ रूट की दूरी कम होगी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य भी तेज होंगे। 2024 में यूपी-उत्तराखंड के संयुक्त प्रस्ताव पर इसकी घोषणा हुई थी, लेकिन अब 2026 में भी सिर्फ कागजी कार्रवाई ही नजर आ रही है। स्थानीय लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है। रामपुर रायघटी के ग्रामीणो ने कहा,पुल न बना तो हर साल बाढ़ में फंस जाते हैं। बच्चों की पढ़ाई, बीमारों का इलाज सब मुश्किल हो जाता है। सरकार सिर्फ वादे करती है। धामी सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। सूत्रों का कहना है कि बजट की कमी और पर्यावरणीय मंजूरी में देरी को वजह बताया जा रहा है, लेकिन आनंद का आरोप इसे राजनीतिक साजिश का रंग दे रहा है।पूर्व राज्यमंत्री रविन्द्र आनंद, जो वरिष्ठ नेता रहे हैं, हाल के दिनों में पार्टी की कई नीतियों पर सवाल उठा चुके हैं। उनका यह बयान धामी सरकार के लिए नई चुनौती बन सकता है, खासकर जब विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं।स्थानीय विपक्ष ने भी आनंद के बयान का स्वागत किया है। कांग्रेस नेता ने इसे “धामी सरकार की असफलता का प्रमाण” बताया। अब देखना होगा कि सीएम धामी इस मुद्दे पर कब चुप्पी तोड़ते हैं और रामपुर रायघटी के लोगों को उनका हक कब मिलता है।जनता की आवाज: पुल का निर्माण तुरंत शुरू हो, वरना सत्ता के भीतरी घात की कीमत आम आदमी को चुकानी पड़ेगी।

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