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महिला सशक्तिकरण राष्ट्र निर्माण का आधार : उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार में पैनल परिचर्चा आयोजित

महिला सशक्तिकरण राष्ट्र निर्माण का आधार : उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार में पैनल परिचर्चा आयोजित l

उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार के महिला प्रकोष्ठ द्वारा “महिला सशक्तिकरण : राष्ट्र निर्माण का आधार” विषय पर एक गरिमामय पैनल परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज एवं राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका पर गंभीर एवं सार्थक विमर्श करना था। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर मुदिता पांडे, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कन्या गुरुकुल परिसर से आमंत्रित की गईं। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब उसकी महिलाएँ शिक्षित, आत्मनिर्भर और निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से सहभागी हों। उन्होंने भारतीय परंपरा में नारी के गौरवपूर्ण स्थान का उल्लेख करते हुए कहा कि नारी केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सृजनात्मक शक्ति है। महिला प्रकोष्ठ की संयोजिका डॉ. श्वेता अवस्थी ने अपने संबोधन में कहा कि महिला सशक्तिकरण राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने विश्वविद्यालय में छात्राओं के सर्वांगीण विकास हेतु संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी देते हुए युवतियों को आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता एवं स्वावलंबन अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर मीनाक्षी रावत ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा, संस्कार तथा आत्मरक्षा प्रशिक्षण महिलाओं को सशक्त बनाने के महत्वपूर्ण साधन हैं। उन्होंने कहा कि जब महिलाएँ अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति सजग होंगी, तभी एक सुदृढ़ एवं समतामूलक राष्ट्र का निर्माण संभव होगा कार्यक्रम में प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं छात्राओं की सक्रिय सहभागिता रही। अंत में प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से विषय के विविध आयामों पर विस्तृत चर्चा की गई तथा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का सफल समापन हुआ।यह परिचर्चा विश्वविद्यालय में महिला सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता एवं जागरूकता का सशक्त उदाहरण सिद्ध हुई।

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