वैदिक ज्योति से प्रज्ज्वलित लक्सर: आर्य समाज के 91वें वार्षिकोत्सव का तृतीय दिवस—यज्ञ की अग्नि में जली राष्ट्रीय एकता की लौ!

लक्सर सूर्योदय की किरणों के साथ ही आर्य समाज मंदिर लक्सर का परिसर वैदिक मंत्रों की गूंज से गूंज उठा। 91वें वार्षिकोत्सव का तृतीय दिवस एक ऐसा दिव्य संकल्प बना, जहाँ यज्ञ की पवित्र ज्वाला ने न केवल हवायें सुगंधित कीं बल्कि हृदयों में सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय गौरव की चिंगारी सुलगा दी। स्वामी दयानंद सरस्वती के अमर सिद्धांतों पर आधारित यह उत्सव, मानव उत्थान का जीवंत संदेश बनकर उभरा जिसने सैकड़ों श्रद्धालुओं को एक सूत्र में बाँध दिया। प्रातःकालीन महायज्ञ: आहुतियों में समर्पित हुए वैदिक आदर्श सुबह 8:00 बजे प्रारंभ हुए इस पावन यज्ञ ने मंदिर को आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना दिया। प्रसिद्ध उपदेशक आदरणीय वीरेंद्र शास्त्री ने ब्रह्मा के रूप में वैदिक मंत्रों का जाप करते हुए हवन कुंड में आहुतियाँ डालीं। हवा में घुली घी की सुगंध और मंत्रों की ध्वनि ने ऐसा वातावरण रचा मानो स्वयं वेदों की देवी सरस्वती साक्षात् विराजमान हों। इस यज्ञ में यजमानों का सम्मानजनक योगदान रहा, जिन्होंने अपने परिवारों संग वैदिक परंपरा को नया आयाम दिया: नीरज गोयल व उनकी धर्मपत्नी ममता गोयल परिवारिक एकता का प्रतीक।डॉ सौरभ वर्धन सिंघल व रचना शिक्षा व सेवा के प्रतीक।प्रवेश गर्ग व पिंकी गर्ग समाजसेवा की प्रेरणा।विजेंद्र व शिक्षा देवी वैदिक मूल्यों के संरक्षक। सतपाल राणा व शोभा देवी राष्ट्रीय उत्थान के दूत। यज्ञ की समाप्ति पर श्रद्धालुओं के चेहरे पर संतुष्टि की चमक झलक रही थी एक ऐसा क्षण जहाँ व्यक्तिगत समर्पण राष्ट्रीय कल्याण से जुड़ गया भजन-उपदेश की मधुर लहरें:हृदयों को छू गया मानव उत्थान का संदेश यज्ञ की ज्वाला ठंडी होते ही भक्ति के स्वरों ने परिसर को मधुरिम से भर दिया। पंडित रिशिपाल पथिक पंडित प्रताप वैदिक कार्य और रमेश चंद्र स्नेही ने परमपिता परमेश्वर के गुणगान वाले भजनों से मंच को जीवंत कर दिया। इन भजनों के माध्यम से उन्होंने राष्ट्रीय सर्वोच्चता, सामाजिक सद्भाव और मानव उत्थान पर गहन चर्चा की—कभी “सत्यं वद, धर्मं चर” का उद्घोष, तो कभी वेदों की महिमा का वर्णन। श्रोताओं की आँखें नम हो गईं, तालियाँ गूंजीं, और हृदयों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ। यह केवल भजन नहीं, बल्कि जीवन दर्शन का जीवंत पाठ था।दोपहर का भव्य सत्र: गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति ने चमकाया उत्सव दोपहर होते ही कार्यक्रम की भव्यता चरम पर पहुँची। मंच पर सजी ध्वजाएँ और फूलों की मालाएँ, मानो वैदिक संस्कृति का स्वागत कर रही हों। दर्जनों गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति ने इस सत्र को ऐतिहासिक बना दिया। प्रमुख अतिथियों में शुमार:दर्जाधारी राज्य मंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि राजनीतिक नेतृत्व का प्रतीक। भाजपा वरिष्ठ नेता एवं प्रदेश सहसंयोजक सचिन अग्रवाल संगठनात्मक शक्ति।वैश्य समाज अध्यक्ष डॉ यशपाल अग्रवाल समाजसेवा के पुरोधा। मैत्री कन्या गुरुकुलम वेद कुलम की संस्थापिका आदरणीय डॉ सविता आर्य जी महिला सशक्तिकरण की प्रेरणा।पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अंबरीश गर्ग स्थानीय विकास के वास्तुकार। राम सिंह वाल्मीकि सामाजिक सद्भाव के सेतु।आर्य समाज प्रदेश मंत्री चंद्र प्रकाश आर्य वैदिक प्रचार के ध्वजवाहक। इसके अतिरिक्त लक्सर आर्य समाज के मंत्री राहुल अग्रवाल कोषाध्यक्ष गौरव आर्य शिवम त्यागी विनय सिंघल बीरबल आर्य सुखपाल आर्य धनपत राय आर्य सेवाराम सिंघल धर्मचंद आर्य गौरव अग्रवाल प्रवेश गर्ग विजय ढल डॉ राजेंद्र वर्मा डॉ सौरभ वर्धन सिंघल डॉ राजपाल बिशनपाल कश्यप मास्टर अरविंद अग्रवाल चौधरी महक सिंह नेत्रपाल जी महाराजपुर डॉ ईश्वर पाल जी सुरेश वाल्मीकि रतेंद्र तिवारी राजपाल आर्य सुरेश आर्य दिनेश चौहान कुलदीप वाल्मीकि रुक्मणी गोयल प्रतिभा आर्य रेखा आर्य सुनीता रानी मैत्री कन्या गुरुकुल मुंडाखेड़ा की ब्रह्मचारिणियाँ सहित मातृशक्ति और बच्चे—सभी ने अपनी उपस्थिति से उत्सव को और समृद्ध किया। यह दिवस केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि वैदिक जागरण का महासंकल्प था। लक्सर का आर्य समाज एक बार फिर साबित कर रहा है कि वेदों की रोशनी में ही भारत का भविष्य उज्ज्वल हो सकता है।आर्य समाज की जय! वेदों की जय! भारत माता की जय!(उत्सव की यह यात्रा जारी है—आइए, हम सब वैदिक मूल्यों को अपनाकर समाज को नई दिशा दें।




