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साक्षी वेलफेयर ट्रस्ट की मुहिम आओ चिलचिलाती धूप से बचाव कर पक्षियों को दें जीवन दान

साक्षी वेलफेयर ट्रस्ट की मुहिम आओ चिलचिलाती धूप से बचाव कर पक्षियों को दें जीवन दान

भीषण गर्मी में पक्षियों का रखे ध्यान अपने घरों की छत पर करें दाने और पानी का इंतजामः क्रांतिकारी शालू सैनी
मुजफ्फरनगर । साक्षी वेलफेयर ट्रस्ट की राष्ट्रीय अध्यक्ष क्रांतिकारी शालू सैनी ने सोशल मीडिया के माध्यम से देश भर की जनता से आसमान से बरसती आग से बचाने के लिए अपने अपने घरों की छतों पर दाने और पानी का इंतजाम करने की अपील की हैं। गर्मी में पानी को अमृत के समान माना जाता है, मनुष्य को प्यास लगती है तो वह कहीं भी मांग कर पी लेता है, लेकिन मूक पशु पक्षियों को प्यास में तड़पना पड़ता है, हालांकि जब वे प्यासे होते हैं तो घरों के सामने दरवाजे पर आकर खड़े हो जाते हैं। कुछ लोग पानी पिला देते हैं तो कुछ लोग भगा भी देते है। इस गर्मी में पशु पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए लोगों को प्रयास करना चाहिए। उन्होने कहा कि गर्मियों में कई परिंदों व पशुओं की मौत पानी की कमी के कारण हो जाती है। लोगों का थोड़ा सा प्रयास घरों के आस पास उड़ने वाले परिंदों की प्यास बुझाकर उनकी जिंदगी बचा सकता है। सुबह आंखें खुलने के साथ ही घरों के आस-पास गौरेया, मैना व अन्य पक्षियों की चहक सभी के मन को मोह लेती है। घरों के बाहर फुदकती गौरेया बच्चों सहित बड़ों को भी अपनी ओर आकर्षित करती है। गर्मियों में घरों के आसपास इनकी चहचहाहट बनी रहे, इसके लिए जरूरी है कि लोग पक्षियों से प्रेम करें और उनका विशेष ख्याल रखें। जिले में गर्मी बढऩे लगी है। यहां का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पार हो गया है। आने वाले सप्ताह और जेठ में और अधिक गर्मी पडऩे की संभावना है। गर्मी में मनुष्य के साथ-साथ सभी प्राणियों को पानी की आवश्यकता होती है। मनुष्य तो पानी का संग्रहण कर रख लेता है, लेकिन परिंदे व पशुओं को तपती गर्मी में यहां-वहां पानी के लिए भटकना पड़ता है। पानी न मिले तो पक्षी बेहोश होकर गिर पड़ते हैं। यही कारण हैं कि दिन प्रतिदिन पक्षियों की प्रजाति लूप्त होती जा रही हैं। पक्षियों की प्रजाति के कम होने का ेकारण कही न कही आदमी भी हैं क्योंकि अपने स्वार्थ के लिए घने जंगलों को साफ करते जा रहे हैं। हरे भरे पेडों की कटाई ज्यादा और पैदावार कम होने से धरती से हरियाली कम होती जा रही हैं जिस कारण विभिन्न पक्षियों की प्रजाति कम होती जा रही हैं।

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