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शब्द संसार साहित्यिक,सांस्कृतिक संस्था मुजफ्फरनगर,की गोष्ठी का आयोजन”

“शब्द संसार साहित्यिक,सांस्कृतिक संस्था मुजफ्फरनगर,की गोष्ठी का आयोजन”

शब्द संसार साहित्यिक,सांस्कृतिक संस्था, मुजफ्फरनगर की काव्य गोष्ठी का आयोजन संस्था की अध्यक्षा डॉ.सविता वर्मां ‘ग़ज़ल’ के आवास पर किया गया।
सभी ने माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित किया।
कवयित्री सपना अग्रवाल ने माँ सरस्वती की वंदना से गोष्ठी का शुभारंभ किया।
कवि राकेश दुलारा के खूबसूरत संचालन ने गोष्ठी में चार चांद लगा दिए।
श्री कृष्ण गोपाल “कृष्ण” ने सामाजिक बुराइयों पर प्रहार करते हुए रचना सुनाई ।
“आज का आदमी दोहरा जीवन जी रहा है।
सपना अग्रवाल ने भगवान श्री राम का गुणगान कुछ इस प्रकार किया-
मैं राम नाम की माला जपु ,हे गिरधर तुम मेरी सुनो।
तुम मर्यादा के पथ पे अडिग,पथ प्रेम के साथी गिरधर सा
बिन मर्यादा के जीवन कैसा, और प्रेम जीवन अनमोल।
सुनीता सोलंकी मीना’ ने ग़ज़ल कुछ यूं कही कि
“सबको वार पे वार है लोग कहने लगे
तीर तलवार है लोग कहने लगे।।
कब बचा प्यार है लोग कहने लगे
ब्याह व्यापार है लोग कहने लगे।।

पुष्पा रानी ने अत्यंत उत्कृष्ट बाल गीत सुनाया।
“बच्चों तुम तस्वीर हो कल के हिंदुस्तान की
नेहरू के सम्मान की चाचा के अरमान की।।

वहीं समाज सेविका गीता ठाकुर ने भगवान श्री कृष्ण से खूबसूरत रचना के माध्यम से प्रश्न करती सुंदर गीत गीत सुनाया।
“मुझे किस विधि लग गया दोष,बता दे सांवरिया।
मैने सोती सास जगाई ना ,मैने खेलती ननद बुलाई ना।
मुझे फिर भी लग गया दोष,बता दे सांवरिया।।
राकेश दुलारा ने अपनी रचना सुनाई प्रेरक गीत सुनाया
“सोच लिया जो कुछ करना है ,संकट दूर भगाऊंगा
कदम न मुझको पीछे करना,आगे बढ़ता जाऊंगा।।

सविता वर्मां ‘ग़ज़ल’ ने खूबसूरत नज़्म के माध्यम से कुछ यूं अहसास बयां किए।
“करे है बात गैरों से,मुझे हर पल सताता है।
ना जाने क्यों मेरा दिलबर,मुझसे नजरें चुराता है।।

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