पंचायत चुनाव को सरकार की हरि झंडी अब गेंद राज्य निर्वाचन आयोग के पाले में l
उत्तराखण्ड में ग्राम पंचायत के चुनाव ग्राम विकास एवं राजनीति में बहुत महत्व रखते हैं, उसका कारण यह भी है कि यही से असल राजनीति आरम्भ होती है।लेकिन कोरोना के चलते पंचायती चुनाव कई बार स्थगित हुए।लेकिन अब समय आ गया है ज़ब ग्रामवासियों को अपना प्रधान चुनने का अवसर जल्दी ही मिलने जा रहा है
उल्लेखनीय है कि हरिद्वार में पिछले पंचायत चुनाव वर्ष 2015 के आखिर में हुए थे।जिसका कार्यकाल 2021 में खत्म हो चुका है, लेकिन कोरोना के चलते यह चुनाव नहीं हो पाए l परन्तु उत्तराखंड पंचायती राज एक्ट, 2016 के अनुसार पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने से 15 दिन पहले तक चुनाव न होने की स्थिति में उन्हें छह माह तक प्रशासकों के हवाले किया जा सकता है। इस क्रम में मार्च से हरिद्वार जिले में त्रिस्तरीय पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए गए। इस अवधि के भीतर भी चुनाव न हो पाने पर सरकार ने पंचायतीराज एक्ट में संशोधन कर प्रशासकों का कार्यकाल छह माह और आगे बढ़ाया था।
हरिद्वार की 306 ग्राम पंचायतों में प्रशासकों का कार्यकाल 29 मार्च को खत्म हो चुका था। इस दौरान सरकार ने पंचायत चुनाव के परिसीमन के लिए निर्वाचन आयोग को प्रस्ताव भेजा था, जिसके बाद निर्वाचन आयोग ने प्रक्रिया आरम्भ तो अवश्य की लेकिन हाईकोर्ट में लंबित मामलो के चलते फिर प्रक्रिया रोक दी गई थी।
मई माह में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र देकर कहा था कि वह तीन माह के भीतर हरिद्वार के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराया जाएगा । इसी के तहत पिछली कैबिनेट बैठक में पंचायत चुनाव के पहलुओं को जानने के लिए महाधिवक्ता से वार्ता की गई। शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में हरिद्वार के पंचायत चुनावों को हरी झंडी दे दी गई है । जिसके बाद अब राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से इसकी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।




